तेहरान, 01 मई (वार्ता) ईरान की लगभग नौ करोड़ की आबादी पिछले दो महीनों से इंटरनेट पर भारी पाबंदियों का सामना कर रही है। यह ‘ब्लैकआउट’ दुनिया के सबसे लंबे और सख्त प्रतिबंधों में से एक बन गया है, जिसने देश की ऑनलाइन अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इंटरनेट बंद होने का सबसे बुरा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ा है। फैशन, फिटनेस, विज्ञापन और खुदरा व्यापार जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों की आय पूरी तरह खत्म हो गई है। गौरतलब है कि ईरान की ऑनलाइन अर्थव्यवस्था ने लंबे समय तक सरकारी पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद खुद को संभाले रखा था लेकिन अब यह चरमरा गई है। अमेरिका और इजरायल के साथ हुए अस्थिर और नाजुक समझौते के बावजूद, ईरान के शासकों ने इंटरनेट सेवा बहाल करने से इनकार कर दिया है। सरकार इस शटडाउन को युद्ध की स्थिति में एक ‘जरूरी कदम’ बता रही है।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के इस फैसले के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। देश पहले से ही प्रमुख उद्योगों पर सरकारी कार्रवाई और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी के कारण बेरोजगारी का सामना कर रहा है। अब इंटरनेट बंद होने से स्थिति और भी खराब हो गई है।
जनवरी से पहले तक ईरान में इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच ठीक थी, हालांकि तब भी सरकार बहुत सी सामग्री को ब्लॉक करती थी। अब वैश्विक वेब (इंटरनेट) तक पहुंच पूरी तरह बंद कर दी गई है। हालांकि इंटरनेट चलाने के कुछ अन्य रास्ते मौजूद हैं, लेकिन वे इतने महंगे हैं कि आम ईरानियों की पहुंच से बाहर हैं। ईरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य अफशीन कोलाही ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इंटरनेट बंद होने से तेहरान की अर्थव्यवस्था को रोजाना लगभग तीन से चार करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष नुकसान हो रहा है, जबकि अप्रत्यक्ष नुकसान इससे दोगुना होने का अनुमान है। ईरान के संचार मंत्री सत्तार हाशमी के अनुसार, देश में लगभग एक करोड़ लोग ऐसे हैं जिनका रोजगार सीधे तौर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर है।

