लंदन, 25 अप्रैल (वार्ता) तुर्की ने संकेत दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होने की स्थिति में वह होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने के अभियानों में भाग ले सकता है।
तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने यहां कहा कि किसी भी संभावित अभियान का नेतृत्व बहुराष्ट्रीय तकनीकी गठबंधन द्वारा किया जाएगा और ऐसे ढांचे के तहत तुर्की को भागीदारी में कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह गठबंधन किसी नये संघर्ष में शामिल होता है तो तुर्की अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करेगा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान पाकिस्तान में होने वाली अगली वार्ता में संभव हो सकता है। इस बीच, अमेरिका ने जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियों को लेकर चेतावनियां तेज कर दी हैं और नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाई है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा कि वे ठोस कार्रवाई के बजाय केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित हैं। पिछले हफ़्ते ब्रिटेन और फ़्रांस द्वारा समुद्री सुरक्षा पर आयोजित कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए, श्री हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका “फैंसी बैठकों” के बजाय “गंभीर” यूरोपीय प्रयास का स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि यूरोप को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि उसकी ऊर्जा आपूर्ति इस मार्ग पर निर्भर है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस संकट में अमेरिका अब यूरोपीय समर्थन पर निर्भर नहीं है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान आर्थिक रूप से दबाव में है और उसे भारी नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों के आसपास गतिविधियों को नियंत्रित कर रही है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने का प्रयास करता है, तो इसे संघर्षविराम का उल्लंघन माना जाएगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। यह चेतावनी फारस की खाड़ी में अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी के बीच आई है। अमेरिकी सेना ने 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले यातायात को प्रभावी ढंग से रोक दिया है। इससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी की आपूर्ति होती है, हालांकि वे कुछ विशेष शर्तों के तहत गैर-ईरानी जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं, जबकि क्षेत्र में तनाव बरकरार है।

