चरमराई हुई है कानून व्यवस्था

मध्य क्षेत्र की डायरी

दिलीप झा

मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था चरमराई हुई हैं और यह बात सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। सरकार से जनता हमेशा उम्मीद रखती है कि प्रदेश में शांति और सौहार्द का माहौल बना रहे। वर्तमान में स्थिति यह है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है। फिल्ड में पुलिस नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के किसी भी शहर में चले जाएं पुलिस सुरक्षा को लेकर फिल्ड में मुस्तैद नहीं है। इसलिए लूट और हत्या की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है। दो दिन पहले राजधानी भोपाल के करौंदा में बदमाश ने एक पुलिसकर्मी के घर में दिनदहाड़े घुसकर महिला को लहूलुहान कर जान लेने की कोशिश की। महिला को नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है लेकिन आरोपी तीन दिन बाद पुलिस की पकड़ में आया है। 21 अप्रैल की रात को मंडीदीप के औद्योगिक क्षेत्र सतलापुर में एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।

हालांकि हत्या का आरोपी को कुछ घंटे के भीतर पकड़ लिया गया लेकिन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल जरूर उठाए जाएंगे कि अपराधियों में पुलिस का खौफ क्यों नहीं है। अपराधी हत्या करने के लिए अनोखे तरीके अपना रहे हैं और मध्यप्रदेश पुलिस इसकी भनक भी नहीं लगती। 22 अप्रैल को शिवपुरी जिला के कोलारस अनुविभाग के तेंदुआ थाना में तीन नकाबपोश बदमाशों ने एक महिला को उसकी सात साल की पोती के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्यारे ने शादी का कार्ड देने के बहाने 67 वर्षीय रामसखी धाकड़ के पैर छुए और फिर कनपटी पर गोली मार दी। अभी तक पुलिस हत्या के आरोपियों को पकड़ नहीं पाई है।

खासकर भोपाल में थाने पुलिस के सामने बदमाश लूट जैसी घटना को अंजाम देकर भाग जाते हैं और पुलिस उनका कुछ नहीं कर पाती है। 22 अप्रैल की सुबह चूना भट्टी थाने से सटे स्वर्ण जयंती पार्क में टहल रही एक रिटायर्ड महिला बैंककर्मी के गले से बदमाशों ने चैन झपट ली। महिला ने शोर मचाया लेकिन तब तक बदमाश फरार हो गया। अभी तक आरोपी को पुलिस पकड़ नहीं पाई है। ंमतलब सुबह में टहलना भी अब सुरक्षित नहीं है।

इसी तरह चैन स्नैचिंग की घटना भी नहीं रुक रही है। यह सर्वविदित है कि इन अपराध के पीछे नशे के सौदागरों का हाथ है।‌ पुलिस को पता है कि शहर में नशे की पुड़िया कहां कहां बेची जाती है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से हिचकती है अथवा अपराधियों से सैटिंग कर लेती है। ऐसे में पुलिस अपराधियों पर अंकुश लगाने का साहस कैसे दिखाएगी, यह एक बड़ा सवाल है और इसका समाधान पुलिस प्रशासन के आला-अधिकारियों को जरूर ढूंढना चाहिए क्योंकि कानून व्यवस्था डिरेल हो रही है। कानून व्यवस्था को सुचारु बनाए बिना बेहतर शासन प्रशासन की कल्पना हो ही नहीं सकती।
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पैसे के लिए शराब की दुकान कहीं भी खोल देंगे
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हर साल प्रदेश के कई जिलों में शहर के मुख्य बाजार ,चौराहे, स्कूल और मंदिरों के पास शराब की दुकानें खोल दी जाती हैं।‌ क्या सरकार पैसे के लिए कुछ भी और कहीं भी शराब की दुकानों को खोल देगी। भोपाल की बात करें तो अरेरा कॉलोनी, गुलमोहर कॉलोनी , अवधपुरी, कोलार रोड, नरेला, ईंटखेड़ी’, प्रोफेसर कॉलोनी से शराब की दुकानों को हटाने की लोग मांग कर रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी आंदोलन कर रही है कि इन स्थानों से शराब की दुकानों को हटाई जाए। फिर यह बात सरकार को समझ में क्यों नहीं आ रही है।
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सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने सख्त कार्रवाई करिए
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पूरे मध्य प्रदेश में सिलेंडर गैस की किल्लत अभी भी है। भोपाल के गांधीनगर और करौंद में लोगों ने गैस एजेंसियों के खिलाफ प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया है।
सरकार दावे कर रही है कि रसोई गैस की किल्लत नहीं है लेकिन हकीकत यह है कि लोगों को सिलेंडर के लिए बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जिलों से खबरें आ रही है कि कालाबाजारी के कारण लोग 2000-3000 रुपये में सिलेंडर लेने के लिए बाध्य हैं।‌ कहीं सुनवाई नहीं हो रही हैं। प्रशासन को चाहिए कि गैस एजेंसियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करें ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।

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