ई-एफआईआर में छेड़छाड़ के आरोप पर वीडियो रिकार्डिंग में बयान दर्ज करने के निर्देश

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने एक मामले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य शासन से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने निर्देश दिये है कि याचिकाकर्ता का बयान वीडियो कैमरे की उपस्थिति में दर्ज किया जाए।दरअसल यह मामला डॉ. अंजलि मिश्रा द्वारा शंकराचार्य नगर कालोनी बाग सेवनिया भोपाल के पदाधिकारियों के विरुद्ध दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा दर्ज कराई गई ई-एफआईआर में सभी आरोपियों के नाम शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल चुनिंदा व्यक्तियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की।

यह भी आरोप है कि पुलिस ने ई-एफआईआर की मूल सामग्री के अनुरूप मामला दर्ज नहीं किया और आरोपी को कमजोर किया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली व अधिवक्ता अमित रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अब तक धारा 161 सीआरपीसी के तहत याचिकाकर्ता का बयान भी दर्ज नहीं किया गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को विस्तृत स्थिति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब भी याचिकाकर्ता का बयान दर्ज किया जाए, वह वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। कोर्ट ने प्रकरण में प्रतिवादी क्रमांक पांच से 14 तक को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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