
जबलपुर। प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री तथा सतना के रैगांव विधानसभा से विधायक प्रतिभा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह ने प्रदेश स्तरीय हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को निर्देशित किया है कि वह 60 दिनों के अंदर राज्य मंत्री प्रतिभा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की जांच करते हुए आदेश पारित करें। कमेटी निर्धारित समय अवधि में आदेश का पालन नहीं करती है तो याचिकाकर्ता पुनः याचिका दायर करने स्वतंत्र है।
नर्मदापुरम जिले की इटारसी तहसील निवासी राष्ट्रीय कांग्रेस भारतीय के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिभा बागरी ने सतना जिले में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रैगवां सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। चुनाव लडने के लिए उनकी तरफ से एससी वर्ग के होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि प्रतिभा बागरी अनुसूचित जाति में नहीं आती है। उन्हें गलत एससी होने का गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से इस बात पर सहमति व्यक्त की गयी कि हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी अनावेदक को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 60 दिनों में फैसला लेकर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी प्रदान करें। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि कमेटी 30 जून 2026 तक आदेश पारित नहीं करती है तो याचिकाकर्ता याचिका को पुन दायर करने स्वतंत्र है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
