रीवा: इस बार मई-जून जैसी गर्मी अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही शुरू हो गई है, आसमान से आग बरस रही है तेज धूप और 42 डिग्री के ऊपर पहुंच चुके तापमान से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है. हालत यह है कि सुबह 8 बजे से तेज धूप शुरू हो जाती है और शाम तक गर्म हवाएं चलती है. हालत यह है कि शादी ब्याह के मौसम में भी दोपहर सडक़ो में सन्नाटा रहता है.
दिन का तापमान जहा 42 डिग्री के ऊपर पहुंच चुका है वही रात का न्यूनतम तापमान भी तेजी से बढ़ते हुए 23 डिग्री तक पहुंच गया है.
जिसके चलते रात भी अब गर्म रहने लगी है. हालाकि सुबह हल्की ठड रहती है. जिस तरह से अभी गर्मी पड़ रही है उसको देख कर लग रहा है कि आने वाले माह में तापमान 45 डिग्री के ऊपर पहुंच जाएगा और गर्मी असर दिखाएगी. जिस तरह से अभी गर्मी पड़ रही है ऐसी गर्मी नौतपा में भी नही पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्र के अपेक्षा शहर में ज्यादा गर्मी है, चारो तरफ ऊंचे भवन और कंक्रीट की सडक़ो ने तापमान को और बढ़ा दिया है. लगातार पेड़ कट रहे है हालत यह है कि हाइवे और माडल रोड़ में छाव के लिये पेड़ नही है. यही वजह है कि शहरी क्षेत्र में भी गर्मी अब तेजी से बढ़ती जा रही है.
दोपहर को लोग निकलने से कतराते है, बढ़ती गर्मी के चलते एसी-कूलर तक काम नही कर रहे है. शाम के बाद भी राहत नही मिल रही है. रात का न्यूनतम तापमान अभी 18 से 20 था लेकिन धीरे-धीरे 23 डिग्री पहुंच गया है, दिन भर गर्म हवाएं चलती रहती है. इस माह के अंत तक तापमान 44 डिग्री तक पहुंच जाएगा. अभी आसमान में बादल लगे हुए है जिसके कारण गर्मी का असर कुछ कम है लेकिन जैसे ही आसमान साफ होगा तापमान तेजी से बढ़ेगा. उम्मीद नही थी कि अप्रैल में मई-जून जैसी गर्मी पड़ेगी. इस बार गर्मी ने सभी को हैरान कर दिया है. लू लगने एवं उल्टी-दस्त बुखार के मरीज अस्पताल में तेजी से पहुंच रहे है.
लगातार खिसक रहा भूमिगत जल स्तर
तेज गर्मी के बीच लगातार भूमिगत जल स्तर नीचे खिसका रहा है. नहरों से पानी बंद कर दिया गया है और नदी तालाब भी सूखने लगे है. बाणसागर नहर से टीएचपी के लिये पानी छोड़ा जा रहा है जिसके कारण बीहर नदी में पानी है. शेष नदियां सूख चुकी है तालाब भी सूख गये है, कुछ तालाब है जहा अभी पानी है. पशु-पक्षियों के लिये भी पानी की किल्लत है, पठारी इलाको में जलसंकट पहले से ही दस्तक दे चुका है. हालत यह है कि हैडपम्प काम नही कर रहे है. राइजर पाइप डालने के बाद भी पानी नही मिल रहा है. दरअसल जल स्तर तेजी से नीचे खिसका रहा है.
