ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे: पिछोर सीट पर तीस साल से लगातार हार का सामना कर रही भाजपा को यहां 21 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दिलाने वाले विधायक प्रीतम लोधी अब अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत बन गए हैं। यहां तक तो ठीक था कि वे बाहुबली छवि के विधायक हैं लेकिन अपने पुत्र की कार से हुए एक्सीडेंट के मामले में उन्होंने जिस तरह सीनियर पुलिस अफसरों से पंगा मोल ले लिया और फ्रीस्टाइल में एक सीनियर पुलिस ऑफिसर को धमकीनुमा चुनौतियां दीं, उससे वे लोग भी हैरान परेशान हैं जो प्रीतम को हर विवाद के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लाते हैं। पता तो यही चला है कि प्रीतम द्वारा सरकारी तंत्र के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा से पार्टी आलाकमान नाराज है और प्रदेश नेतृत्व से रिपोर्ट तलब की है।
सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए अलग अलग सोर्सेज से जानकारियां जुटाकर सूबाई सदर हेमंत खंडेलवाल ने केंद्र को रिपोर्ट भेज भी दी है। प्रदेश नेतृत्व आग में घी डालने या हवन में हाथ जलाने जैसी स्थितियों से बचने के लिए अपने स्तर पर कोई एक्शन लेने के बजाए दिल्ली से आने वाले दिशा निर्देश का इंतजार कर रहा है। कार्रवाई में अलाली की एक वजह इसी अट्ठाइस को आयोजित हो रहा लोधी समाज का सम्मेलन भी है। किसी भी कार्रवाई को यह सम्मेलन होने तक टाला जा सकता है। अंदरखाने इस बात की भी सुगबुगाहट है कि मिलट्री की महिला अधिकारी पर टिप्पणी करने के बाद विवाद में फंसे मिनिस्टर कुंवर विजय शाह की तर्ज पर प्रीतम लोधी को बचाने की कवायद भी चल रही है।
बीते रोज वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद पटेल की हेमंत खंडेलवाल से हुई मुलाकात के बाद यह अटकलें ज्यादा तेज हो गईं। खबर यह है कि पटेल ने प्रदेश नेतृत्व के समक्ष प्रीतम लोधी का पक्ष रखा है। प्रीतम के खिलाफ किसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई में विलंब का एक बड़ा फैक्टर पूर्व सीएम उमा भारती से उनकी नजदीकी भी है। अब जबकि विधानसभा चुनाव में ढाई साल और स्थानीय निकाय चुनाव में बमुश्किल एक साल बाकी है, सत्तारूढ़ दल लोधी वोटबैंक को नाराज नहीं करना चाहता। लिहाजा कोई ऐसा रास्ता तलाशा जा रहा है कि कार्रवाई की औपचारिकता पूरी हो जाए और लोधी समाज नाराज भी न हो। वैसे ब्राह्मण समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर प्रीतम छह माह के लिए पार्टी से निष्कासित रह चुके हैं तब उन्होंने ओबीसी महासभा के साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। प्रीतम के खाते में एकमात्र बड़ी उपलब्धि पार्टी के लिए पिछले तीन दशकों से हाई रिस्क जोन मानी जाने वाली पिछोर सीट पर कमल खिलाना और कांग्रेस के कद्दावर नेता कक्काजू के अभेद्य दुर्ग को ढहाना है, देखना है कि ताजा विवाद में उनका यह प्रोफाइल कितना काम आता है।
अब कांग्रेस किस मुंह से करे घेराबंदी
कांग्रेस एक ओर भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बयानों को लेकर हमलावर है वहीं कांग्रेस के ही कई बार पार्षद रह चुके और मौजूदा वक्त मेयर-इन-काउंसिल की जिम्मेदारी संभाल रहे विनोद यादव के बिगड़े बोल पार्टी और कांग्रेस शासित निगम परिषद के लिए मुसीबत बन गए हैं। हालांकि पार्षद महोदय ने अपना बेलगाम गुस्सा शहर में व्याप्त पानी संकट को लेकर जाहिर किया लेकिन जिस धमकीनुमा भाषा का उन्होंने इस्तेमाल किया, वह उस तहजीब और नफासत के ठीक उलट है, जिसका कांग्रेस दावा करती रही है। एमआईसी सदस्य के शब्द हैं – मेरे पास तेल पिला हुआ लट्ठ रखा है, जो उन अधिकारी ओर कर्मचारियों के लिए है जो पानी नहीं दे रहे हैं। इनको टंकी पर लेकर जाकर लगे पड़ेगें, जूते चप्पलों की माला पहनवाएंगे। इस बयान के बाद पानी सप्लाई की जिम्मेदारी संभालने वाले निगम के पीएचई महकमे के इंजीनियर नाराज हैं और कांग्रेस की तरफ से भी उन पर बयान वापस लेने का दवाब पड़ रहा है।
अकासा का श्रेय लेने की होड़
ग्वालियर से दिल्ली और बेंगलुरु के लिए अकासा एयरलाइंस की नई विमानसेवा मंजूर होने के साथ ही ग्वालियर के छत्रपों में इसका श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। सिंधिया और सांसद भारतसिंह दोनों ने ही इसका श्रेय अपने अपने खाते में दर्ज कराया है। पार्टी की गुटबाजी भी सामने आई। ऊर्जा मंत्री ने अपने बयान में सीएम, नागरिक उड्डयन मंत्री और सिंधिया के प्रयासों का उल्लेख तो किया लेकिन उनके बयान में भारतसिंह का नाम नहीं था। उधर भारतसिंह का कहना है कि वे सांसद होने के नाते एयरपोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन हैं और यह विमानसेवा दिलाने अरसे से कोशिश कर रहे थे।
