दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
लोकसभा में पेश महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और इससे जुड़ी जनगणना व परिसीमन विधेयक के गिरने के बाद आरंभ हुई राजनीतिक परिचर्चा अब संसद से सड़क की ओर बढ़ चली है. हरेक दल एक दूसरे को छोटा और महिला विरोधी बताकर अपनी अपनी पीठ थपथपाने के फिराक में है. शह-मात के इस खेल में दलों के प्रथम पंक्ति के नेता भी अपने को मोर्चाबंदी पर लगाकर इसकी धमक गांव व शहरों की गलियों तक पहुंचाने के लिए बहुस्तरीय रणनीति को अमलीजामा पहनाने में लगे हैं. जिस तरह का राजनीतिक बवंडर खड़ा हो रहा है उसके कारण समय, काल परिस्थित इस बिल के औचित्य पर सार्थक बहस के लिए भी वक्त देने को तैयार नहीं है. सत्ताधारी आक्रमण और विपक्षी बचाव के बीच चल रहे नोंक-झोंक से इतर किनारे खड़ी महिलाएं अपनी भविष्य व भूमिका को लेकर असमंजस की स्थिति में दिख रही हैं.
बंगाल फतह के लिए भाजपाईयों ने झोंकी ताकत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपाई रणनीतिकारों ने प्रचार अभियान को इस रूप से सुसज्जित किया है कि लोग यह कहने लगे हैं कि पश्चिम बंगाल का कोई भी गांव या मुहल्ला उनके केन्द्रीय कंट्रोल रूम से दूर नहीं है. दिल्ली में स्थापित कंट्रोल रूम न सिर्फ राज्य मुख्यालय से जुड़ा है बल्कि सभी विधानसभा क्षेत्रों के पंचायतों व गांवों में हो रहे हलचल पर नजर रखे हुए हैं. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भाजपाई आक्रामक प्रचार अभियान की खूब चर्चा हो रही है. पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्यों के अलावा हिंदी भाषी राज्यों के सांसद,विधायक, पार्षद और जिला संगठन के प्रखर वक्ताओं को जमीनी स्तर पर उतारा गया है. केन्द्रीय नेतृत्व की ओर से भी सभी संभव ताकत झोंक दी गई है. संभवतः इसी वजह से कहा जा रहा है कि इससे पहले किसी भी प्रदेश में इस तरह से प्रचार अभियान को सुसज्जित नहीं किया गया था. जबकि दूसरी ओर सत्ता बचाने के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने भी जबरदस्त मोर्चाबंदी कर रखी है.
सम्राट के नेतृत्व में बहुस्तरीय बदलाव की सुगबुगाहट
बिहार में पहली बार भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के अगुआ सम्राट चौधरी ने सूबे में बेहतर व पारदर्शी शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए ठोस रणनीति पर आगे बढ़ना आरंभ कर दिया है. हालांकि अभी भी नीतीश कुमार की परछाई सत्ता पर काबिज दिख रही है लेकिन इन सबके बीच सम्राट चौधरी जहां एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ व समकक्षों के साथ समन्वय स्थापित करने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बदलाव की धमक देने के प्रयास में लगे हैं. चर्चा है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा और ब्लाक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की जाएगी.
पार्टी को एकजुट रखने में जुटे नीतीश
जदयू प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों अपने संगठन को एकजुट करने में लगे हैं. पार्टी पर अपनी पकड़ पहले की भांति बरकरार रखने के लिए नीतीश कुमार ने जिस तरह से अपने चहेते व विश्वासपात्र नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया है उसी तर्ज पर वरिष्ठ सहयोगी श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर संदेश स्पष्ट करने का प्रयास किया है. चर्चा है कि नीतीश कुमार जल्द ही जिलास्तरीय दौरा करने वाले हैं ताकि बिहार की राजनीतिक सरजमीं पर अपनी छाप को कायम रख सकें. कुछ लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार दिल्ली के बजाय बिहार की राजनीति में ही अपनी उपस्थिति रखना चाहते हैं.
महिला विधेयक बहस में सुर्खियों में रही प्रियंका
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान वैसे तो सभी दलों के नेताओं ने बेहतर तर्कों के साथ अपने पक्ष को रखकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई लेकिन इन सबके बीच विपक्षी खेमे से प्रियंका गांधी ने जिस अंदाज में सत्ता पक्ष का विरोध करते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया उसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में खूब हुई. जहां एक तरफ गृहमंत्री अमित शाह ने अपने जवाबी संबोधन में भी प्रियंका की शैली पर प्रकाश डालते हुए दूसरों को नसीहत दी वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रियंका के अंदाज की तारीफ करते हुए कहा कि जो मैं वर्षों में नहीं कर सका उसे प्रियंका ने कर दिखाया.
