
बीना। शहर की पुरानी गल्ला मंडी के पास स्थित प्रताप वार्ड में बने देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी मंदिर पर अक्षय तृतीया के मौके पर बांके बिहारी के चरणों के दर्शन होंगे। इसके लिए जोर शोर से मंदिर में तैयारियां चल रही हैं।जिस तरह से वृंदावन में अक्षय तृतीया के मौके पर बांके बिहारी मंदिर में साल में एक बार ठाकुर जी के चरण दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं, जिसे काफी शुभ माना जाता है। बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर साल में एक बार ठाकुर जी के चरणों के दर्शन भक्त कर सकते हैं। चरण दर्शन के लिए अक्षय तृतीया पर सुबह 5 बजे से ही भक्तों की भीड़ लगना शुरू हो जाती है।मंदिर के पुजारी राहुल महाराज ने बताया कि अक्षय तृतीया के मौके पर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी मंदिर पर ठाकुर जी के चरण दर्शन के लिए पूरे दिन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सुबह 5 बजे राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल मां जागेश्वरी धाम से बांके बिहारी जी के लिए पाजेब लेकर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी मंदिर सुबह चरण दर्शन के लिए पधारेंगे। इस दौरान संकीर्तन कार्यक्रम, आरती और प्रसाद का वितरण किया जाएगा। पूरे दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया यह परंपरा वृंदावन धाम में बांके बिहारी जी के चरण दर्शन साल में केवल एक बार अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर होते हैं। वैसे ही 20 अप्रैल 2026 वैशाख शुक्ल तृतीया को है जब भक्त चरण दर्शन कर सकते हैं इस विशेष दिन चरणों में चंदन का लेप लगाया जाता है और पाजेब पेहनाई जाती है। साल भर नहीं होते हैं चरण दर्शन पंडित रमन दीक्षित ने बताया कि पूरे वर्ष चरण पोशाक वस्त्र में छिपी रहती है, केवल अक्षय तृतीया के दिन ही उनके दिव्य चरणों के दर्शन होते हैं। ऐसी मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी ने भगवान को भीषण गर्मी से बचने के लिए चंदन का लेप किया था और यह तभी से परंपरा चली आ रही है।अक्षय तृतीया को बांके बिहारी जी के चरण दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है इस दिन भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि जिस तरह वृंदावन में बांके बिहारी जी को भोग लगाया जाता है वैसे ही मंदिर में ही भोग तैयार होता है और ठाकुर जी को अर्पित किया जाता है।इसके अलावा वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर की तरह सभी क्रियाएं होती हैं।मंदिर की जगह कभी कचरे का ढेर हुआ करता था।शहर के प्रताप वार्ड के खारे कुआं के पास जिस जगह पर देव श्री बड़केश्वर बिहारी जी का मंदिर बना हुआ है। वहां पर आज से करीब तीन साल पहले कचरे का ढेर लगा रहता था।रमन दीक्षित, भुवनेंद्र राय ने बताया कि कुछ सालों पहले वार्ड के लोगों की इच्छा हुई कि यहां पर बरगद के पेड़ के नीचे बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की जाए। सभी लोगों की सहमति से बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई। इसके बाद समिति के सदस्यों ने बड़केश्वर बांके बिहारी जी की विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। धीरे-धीरे मंदिर विकसित होता गया और मंदिर में शिवलिंग के अलावा शिव परिवार मौजूद है।
