
नीमच। अफीम उत्पादक किसानों के सिर पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। फसल वर्ष 2025-26 के लिए अफीम और क्षारोद कारखाना, नीमच से जारी हुए जाँच परिणामों ने अन्नदाताओं की नींद उड़ा दी है। तौल केंद्रों पर ‘एसटीडी’ (STD) ग्रेड पाने वाली अफीम, प्रयोगशाला की रिपोर्ट में ‘खराब’ साबित हो रही है, जिससे सैकड़ों किसानों को अब अपने पट्टे कटने का खौफ सता रहा है।
मशीन में ‘गड़बड़ी’ या जाँच का ‘खेल’:-
12 अप्रैल 2026 को जारी हुए परिणामों ने पूरे अफीम बेल्ट में हड़कंप मचा दिया है। किसानों का आरोप है कि अफीम जाँच में इस्तेमाल की जा रही उच्च तकनीक की मशीनें या तो खराब हैं, या उनमें जानबूझकर त्रुटिपूर्ण सेटिंग की गई है।
अजीब स्थिति तो तब बनी जब जाँच के लिए पुरानी मशीनों का सहारा लिया गया। 30 ग्राम अफीम के सैंपल की जाँच, जो पुरानी मशीनों से की गई, उसके परिणाम भी पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण आए। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि मशीनें ही भरोसेमंद नहीं हैं, तो इसके आधार पर किसानों के भविष्य का फैसला कैसे लिया जा सकता है?
लाखों किसानों के भविष्य पर तलवार:-
नीमच, मंदसौर, चित्तौड़ और प्रतापगढ़ के अफीम किसान इस समय भारी मानसिक तनाव में हैं। मेहनत-मशक्कत से तैयार की गई फसल, जो तौल के दौरान उत्तम (STD) पाई गई थी, लैब की रिपोर्ट ने उसे सिरे से नकार दिया है।
किसानों का तर्क: तौल के समय अफीम की गुणवत्ता संतोषजनक थी।
डर: गलत रिपोर्ट के कारण पट्टे कटने से किसान न केवल आर्थिक रूप से बर्बाद होंगे, बल्कि वर्षों से चली आ रही उनकी आजीविका पर भी विराम लग जाएगा।
‘अन्नदाता’ के पक्ष में उतरे बंशीलाल गुर्जर:-
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बंशीलाल जी गुर्जर ने अफीम किसानों की आवाज बुलंद की है। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए नारकोटिक्स कमिश्नर (ग्वालियर) दिनेश बोद्ध को पत्र लिखा है।
पत्र में प्रमुख माँगें:
जाँच परिणामों में आ रही विसंगतियों को देखते हुए, सभी सैंपलों की नए सिरे से पारदर्शी तरीके से जाँच की जाए।
मशीनों की तकनीकी त्रुटियों की निष्पक्ष जांच हो।
दोषी पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के साथ न्याय हो सके।
अब क्या होगा:-
नारकोटिक्स विभाग के सामने अब साख बचाने की चुनौती है। किसानों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी माँगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। फिलहाल, अब सभी की निगाहें ग्वालियर नारकोटिक्स मुख्यालय पर टिकी हैं कि क्या विभाग पुरानी मशीनों और संदिग्ध रिपोर्टों पर दोबारा विचार करता है या फिर किसानों को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।
