
शाजापुर। कहा जाता है मंदिर में पुजारी, मस्जिद में मौलाना, ऊपर भगवान और नीचे पटवारी…राजस्व के जितने भी मामले होते हैं उनमें अधिकांश में पटवारियों की गलती का खामियाजा आमजनों को भोगना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जिमसें एक किसान ने जिस व्यक्ति से जमीन ली थी और उसका नामांतरण होने के बाद भी पटवारी ने जमीन विक्रेता के परिजनों के नाम से ही फौती नामांतरण कर दिया. जिस कारण क्रेता किसान को शासन की तमाम योजनाओं से वंचित होना पडा. विगत 15 वर्षो से किसान को प्राकृतिक आपदा का मुआवजा, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि सहित समय समय पर शासन द्वारा किसानों को दी जाने वाली मदद नहीं मिल सकी.
गौरतलब है कि गांव जहांनपुर पटवारी हल्का रेहली में मुराद खान से सन् 1998 में जमीन गांव के ही विक्रमसिंह पिता गंगाराम ने खरीदी थी. जिसका नामांतरण भी विक्रमसिंह द्वारा करा लिया गया. लेकिन इसी बीच रेहली के तत्कालीन हल्का पटवारी विजय वसा की गलती कहें या जानबूझकर की गईत्रुटी, जो जमीन शासकीय अभिलेखों में विक्रमसिंह के नाम पर दर्ज थी उसको साल 2010-2011 में मुराद खान के परिजनों के नाम पर कर दिया गया. वहीं 2016 में प्रकरण क्रमांक 2 दी. 18 जनवरी 2016 को फौती नामांतरण मुनव्वर खान पिता मुराद खान के नाम से कर दिया. जबकि यह जमीन मुरादखान ने विक्रमसिंह को सालों पहले बेच दी थी तथा जिसका नामांतरण भी हो गया था. लेकिन पटवारी विजय वसा की लापरवाही से विक्रमसिंह जो खुद जमीन के मालिक थे उनकी जमीन पर मुरादखान के परिजनों का नाम दर्ज कर दिया गया. जिस कारण जमीन मालिक विक्रमसिंह को वर्षो तक सरकार की योजनाएं जैसे फसल बीमा, पाकृतिक आपदा का मुआवजा का लाभ नहीं मिल सका. यह लाभ मुराद खान के परिजनों को मिलता रहा.
अब इसे सिस्टम की गलती कहें या पटवारी की लापरवाही, पटवारी विजय वसा की लापरवाही से किसान खुद की जमीन को वापस खुद के नाम कराने के लिए 15 साल तक तहसील और पटवारी के चक्कर लगाता रहा. किसान विक्रमसिंह खुद की जमीन पर खुद का आधिकारिक रूप से नाम जुडवाने के लिए परेशान होता रहा. आश्चर्य की बात तो यह है कि बिना किसी राजस्व अधिकारी की अनुमति के एक पटवारी ने एक किसान की जमीन का फर्जी तरीके से फौती नामांतरण कर दिया. इसको लेकर किसान ने शाजापुर एसडीएम न्यायालय में मामला दायर किया तब कहीं जाकर 13 मार्च 2026 को फर्जी फौती नामांतरण की त्रुटी में सुधार किया गया.
पटवारी पर क्या होगी कार्रवाई…?
एक पटवारी की लापरवाही से एक किसान 15 साल तक खुद की जमीन को शासकीय अभिलेखों में अपने नाम पर कराने के लिए जदोजहद करता रहा. याने कि खुद की जमीन को खुद के नाम कराने के लिए विक्रमसिंह को 15 साल लग गए. लेकिन इस गंभीर लापरवाही के लिए तत्कालीन पटवारी विजय वसा पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जबकि इस मामले में पटवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए थी.
