
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों से जारी ‘चिता आंदोलन’
आखिरकार स्थगित हो गया। पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक निर्णायक बैठक के बाद, धरना दे रहे आदिवासी महिलाओं और किसानों ने सशर्त अपना आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि मुआवजे की विसंगतियों को दूर करने के लिए अब अधिकारी स्वयं धरातल पर उतरेंगे।
प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के मुताबिक, एसडीएम स्तर के अधिकारी स्वयं प्रभावित गांव-गांव जाकर पुनर्वास और मुआवजे से जुड़ी खामियों का दोबारा सर्वे करेंगे। इसके लिए सात दिनों का एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर प्रभावित परिवार की शिकायतों का निराकरण करने का प्रयास होगा। प्रशासनिक अमले ने स्वीकार किया कि सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति का हक न मारा जाए। इस भरोसे के बाद ही आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त किया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने इस जीत को ‘सशर्त विराम’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि प्रशासन को अपनी कार्ययोजना लागू करने के लिए केवल 10 दिनों का समय दिया गया है। भटनागर ने चेतावनी दी कि यदि इस समय सीमा के भीतर प्रभावितों की मांगें पूरी नहीं होती हैं और सर्वे में लापरवाही बरती गई, तो क्षेत्र में दोबारा पहले से भी विशाल ‘महा आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।
