सतना : भारत की जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य है, जिसे पूरी जिम्मेदारी के साथ संपादित किया जाना चाहिए. कुछ इस तरह की ताकीद जनगणना कार्य में संलग्र प्रगणकों और सुपरवाइजरों को लगभग हर रोज सुनने का मिल रही है. लेकिन जिन जिम्मेदारों द्वारा इस तरह की ताकीद की जा रही है, वे इस बात से पूरी तरह अनभिग्य बने हुए हैं कि जनगणना कार्य में संलग्र शिक्षकों को कम से कम गुणवत्तापूर्ण भोजन तो मुहैया करा दिया जाए. जिम्मेदारों की इसी अनदेखी का फायदा उठाते हुए सप्लायर द्वारा इतना घटिया भोजन भेज दिया गया कि उसकी हालत देख शिक्षक आक्रोशित हो गए.
वहीं कुछ ने तो अपनी थालियां ही फेंक दीं.जनगणना कार्य आरंभ होने से पहले इस कार्य में संलग्र शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरु हो गया है. इसी कड़ी में स्थानीय शासकीय व्यंकट क्र. 1 उत्क्रष्ट विद्यालय परिसर में शिक्षकों का प्रथम चरण का प्रशिक्षण आरंभ हुआ. प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों के लिए चाय और भाजन की व्यवस्था शासकीय दिशा निर्देशों के आधार पर की गई थी. लेकिन दोपहर होने पर जब शिक्षकों को भोजन थमाया जाने लगा तो उनके चेहरों पर असंतुष्टि के भाव पनपने लगे. शिक्षकों को जो थाली सौंपदी गई थी उसमें सब्जी-रोटी, दाल-चावल सहित मीठे में नारियल की बर्फी जैसी खाद्य सामग्री मौजूद थी. भोजन न सिर्फ काफी घटिया स्तर का था बल्कि कुछ थालियों में से भोजन के खराब हो जाने की गंध भी आ रही थी.
इतना ही नहीं बल्कि भोजन की हालत को देखते हुए अधिकांश शिक्षकों ने भूखे पेट रहने में भलाई समझी. शिक्षकों का कहना था कि यदि इस तरह के दूषित भोजन का सेवन किया गया तो स्वास्थ्य खराब होना लगभग तय है. यह देखते ही वहां पर मौजूद शिक्षकों का आक्रोश बढऩे लगा. उन्होंने भोजन व्यवस्था पर भला-बुरा कहना शुरु कर दिया. इसी दौरान घटना से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर भी वाइरल होने लगी. चूंकि शहर के अंदर जनगणना प्रशिक्षण से संबंधित जिम्मेदारी नगर निगम को उठानी है. लिहाजा मामले के संज्ञान में आने पर नोडल अधिकारी उपायुक्त वित्त ननि सत्यम मिश्रा सक्रिय हो गए. उपायुक्त ने फौरन ही भोजन की सप्लाई करने वाले ठेकेदार को तलब किया और कड़ी फटकार लगाई. इसी कड़ी में उन्होंने सख्त ताकीद की कि यदि भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आई तो वे कार्रवाई करने से नहीं हिचकेंगे.
प्रति शिक्षक 200 रु का बजट
प्राप्त जानकारी के अनुसार जमनगणना प्रशिक्षण कार्य में संलग्र शिक्षकों को चाय और भोजन उपलब्ध कराने के लिए 200 रु का बजट रखा गया है. लेकिन इसके बावजूद भी शिक्षकों को ऐसा भोजन मिला मानों कहीं और का बचा-खुचा खाना पैक कराकर भेज दिया गया हो. हलांकि शिक्षकों ने सामने आकर कुछ भी बोलने से मना कर दिया. लेकिन उनमें से अधिकांश यहीं मानना था कि चाहे निर्वाचन हो अथवा जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व केकार्य, शिक्षकों को हमेशा से हाशिए पर ही रखा जाता है.
लग गया प्लास्टिक का ढेर
एक ओर जहां नगर निगम द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर शहर को प्लास्टिक से मुक्त करने का प्रचार जोर-शोर से किया जाता है. लेकिन जब बात इस पर स्वयं अमल करने की आती है तो ननि की प्राथमिकता कहीं गुम हो जाती है. जनगणना कार्य में संलग्र शिक्षकों को जो गुणवत्ताहीन भोजन दिया गया उसे दरअसल प्लास्टिक की थालियों में पैक किया गया था. जिसका नतीजा यह हुआ कि व्यंकट 1 उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में उक्त प्लास्टिक की थालियों का ढेर लग गया, जो हवा में उडक़र जहां तहां बिखरने लगा. लिहाजा जब तक विद्यालय प्रबंधन द्वारा सफाई नहीं कराई जाती तब तक प्लास्टिक का वह कचरा परिसर में प्रदूषण फैलाता रहेगा
