इंदौर: शहर और प्रदेश में बेहतर जल प्रबंधन के लिए इंदौर उत्थान अभियान समिति ने जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठन की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है. इसके पीछे समिति का उद्देश्य है कि शहर में कहीं दूसरा भागीरथपुरा क्षेत्र जैसी त्रासदी नहीं हो. समिति की बैठक में बताया गया है पिछले 20 – 25 साल से शासन जल मल प्राधिकरण गठन को टाल रहा है.भागीरथपुरा की घटना के बाद आज एक बार फिर शहर में नगर निगम से अलग जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठन की मांग उठी है. यह बात अलग है कि जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठन को लेकर कई सरकारों में प्रस्ताव गए, लेकिन राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वोट के चक्कर में मामला लगातार टाला जा रहा है.
आज इंदौर उत्थान अभियान समिति की बैठक हुई, जिसमें समिति सदस्यों ने भागीरथपुरा में मौतों का जिम्मेदार स्वयं को भी माना है. इसके बाद समिति के अजीत सिंह नारंग ने जल मल को लेकर सिलसिलेवार प्रेजेंटेशन दिया. प्रेजेंटेशन में बताया कि किस तरह से इंदौर, प्रदेश और विदेशों में पानी का उपयोग किया जा रहा है. उसमे इंदौर में कैग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया. साथ ही बैठक के अंत में समिति सदस्यों ने एक सुर में जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठित करने की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया और शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की तरह भागीरथपुरा जैसी त्रासदी नहीं होने का संकल्प लिया.
दिग्विजयसिंह सरकार ने मंजूर कर दिया था
इंदौर उत्थान अभियान समिति की बैठक में 17 मई 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय ने 17 लोगों की उपस्थिति में समिति के तथ्यों से सहमत होकर अगले मुख्यमंत्री काल में जल मल प्राधिकरण बोर्ड व्यवस्था लागू करने की सहमति दी थी. दिग्विजयसिंह चुनाव हार गए और सरकार जाते ही मामला आया गया कर दिया गया.
सिंगापुर में ट्रीटेड पानी को पीने के पानी में बदल दिया
नारंग ने बताया कि सिंगापुर में ट्रीटेड पानी को रिसाइकल करके पीने लायक पवित्र पानी बना दिया. उसका कारण है मजबूत प्रबंधन और मॉनिटरिंग. पानी कितना सप्लाई हुआ, जितना सप्लाई किया उतना जनता तक पहुंचा या नहीं. इसके बाद 100 प्रतिशत राजस्व वसूली. इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
कई देशों के वाटर मैनेजमेंट का जिक्र
बैठक में चीन, श्रीलंका, इजरायल और साउथ अफ्रीका के पानी मैनेजमेंट और सप्लाई, टैक्स की जानकारी दी गई.
इंदौर में वॉटर लाइन के नक्शे नहीं
शहर में 1400 किलोमीटर पानी पाइप लाइन है, जिसमें 1020 किलोमीटर लाइन का नक्शा नहीं है. साथ ही पता नहीं है कि लाइन में लीकेज या ड्रेनेज कैसे मिल रहा है.
शहर में पानी का घाटा 26 करोड़ से 150 करोड़ के पार
बैठक में वॉटर ऑडिट के आधार पर बताया गया है कि 1996 में नगर निगम को नर्मदा जल वितरण से 26 करोड़ का घाटा हो रहा था. 2017 में नगर निगम को नर्मदा जल का घाटा 140 करोड़ रुपए पार कर गया. आज 150 करोड़ से ज्यादा का नुकसान नगर निगम को 44 प्रतिशत पानी की बर्बादी से हो रहा है.
इंदौर को लेकर कैग की रिपोर्ट भयावह
केंद्र सरकार द्वारा इंदौर के पानी को लेकर कैग ने रिपोर्ट जारी की है, जो भयावह स्थिति को दर्शाती है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 70 प्रतिशत पानी बिना राजस्व के सप्लाई किया जा रहा है. इतना ही नहीं 45 प्रतिशत पानी बर्बाद भी हो रहा है. जल कर के 440 करोड़ रुपए से 280 करोड़ मुफ्त का पानी बांटा जा रहा है.
अनदेखी की गई
इंदौर उत्थान अभियान समिति की बैठक में बताया गया है 1963 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी के समय जल मल बोर्ड गठन का मामला उठाया गया था. उसके बाद 1978 में इसके गठन की घोषणा हुई. 1979 में बोर्ड बनाने का प्रस्ताव हुआ. 1980 में अर्जुनसिंह ने कमेटी बनाई. अलग जल मल बोर्ड के लिए तत्कालीन महापौर और वर्तमान में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 2002 में एमआईसी से अनुमति लेकर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा था. योजना आयोग में बाबूलाल जैन ने भी प्रस्ताव रखा था, मगर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमजोरी और वोट को लेकर पिछले कई सालों से गठन टाला जा रहा है.
जल मल प्राधिकरण बोर्ड में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर रहेगा
1. अपनी योजना बनाना
2. आर्थिक प्रबंधन
3. टंकियों से वितरण
4. मॉनिटरिंग सिस्टम
5. जल संवर्धन
6. रीसाइक्लिंग
7. पानी की बचत
