बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू सलेम की समय पूर्व रिहाई की याचिका खारिज की

मुंबई, 15 अप्रैल (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य आरोपी एवं गैंगस्टर अबू सलेम की सजा में छूट और जेल से जल्दी रिहाई की मांग संबंधी याचिका बुधवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि प्रथम दृष्टया सलेम ने अभी तक 25 साल की जेल की सजा पूरी नहीं की है।

धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सलेम ने टाडा अधिनियम के तहत गठित एक विशेष अदालत ने 10 दिसंबर 2024 को उसकी समय पूर्व रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने अपने आदेश के मुख्य हिस्से में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा और गैंगस्टर की ओर से दी गयी दलीलों से असहमति जतायी। मामले के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।

बचाव पक्ष की वकील फरहाना शाह ने तर्क दिया था कि भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के अनुसार, सलेम हिरासत में 25 साल पूरे कर चुका है और इसलिए वह सजा में छूट का हकदार है। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने विचाराधीन कैदी के रूप में 11 साल, 9 महीने और 26 दिन और अपराधी के रूप में 9 साल, 10 महीने और 4 दिन पूरे कर लिए हैं, जबकि अच्छे आचरण के कारण उसे 3 साल और 16 दिन की छूट दी गयी थी। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि इस प्रकार 24 दिसंबर, 2024 तक वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है।

अभियोजन पक्ष ने सलेम की याचिका का कड़ा विरोध किया और इसे निराधार बताया। केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि पुर्तगाल को दिया गया संप्रभु आश्वासन कि सलेम को 25 साल से अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जायेगा, केवल उस अवधि को पूरा करने के बाद ही प्रासंगिक होगा। सरकार के अनुसार, यह अवधि 10 नवंबर, 2030 को पूरी होगी।

मई 2025 में मंत्रालय के दायर हलफनामे के अनुसार, 31 मार्च, 2025 तक सलेम ने हिरासत में 19 साल, पांच महीने और 21 दिन पूरे किये थे। सरकार ने उस पर यह भी आरोप लगाया कि वह समय पूर्व रिहाई की पात्रता का दावा करने के लिए अलग-अलग अपराधों की सजा के कारण जेल में बितायी गयी भिन्न-भिन्न अवधियों को आपस में मिलाने की कोशिश कर रहा है।

 

 

 

 

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