बजट के अभाव में खतरे में सेहत: डेढ़ साल से नहीं बने हैंडपंपों के प्लेटफॉर्म, पीएचई और पंचायतें आमने-सामने

अशोकनगर: जिले के बहादुरपुर क्षेत्र के दर्जनों सरकारी हैण्डपंपों में प्लेटफार्म नहीं है। जिससे हैण्डपंपों के आसपास पानी का भराव हो रहा है और यह पानी सीधे बोर में जा रहा है। पानी के हैण्डपंपों के पास जमा रहने और बोर में जाने के कारण पानी दूषित होने की आषंका बढ़ रही है। इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे बीमारियों को दावत देना है। इन दिनों मौसम दिन प्रतिदिन गर्म होता जा रहा है।

यह मौसम पानी में बीमारी जनित कीटाणुओं के पनपने का मौसम है। ऐसे में बगैर प्लेटफार्म वाले हैण्डपंप जल जनित बीमारियों को फैलाने वाले साबित हो सकते हैं। खास बात है कि पीएचई के पास बीते डेढ़ वर्ष से बगैर प्लेटफार्म वाले हैण्डपंपों पर प्लेटफार्म बनाने के लिए कोई राशि नहीं आई है। पीएचई के उपयंत्री रोहित त्यागी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष कम से कम 50 हैण्डपंपों के प्लेटफार्म बनाने का लक्ष्य आता था लेकिन डेढ़ साल से बंद है। उन्होंने कहा कि हमने पोस्ट मानसून क्लोरीनेशन जरूर सभी हैण्डपंपों में कराया है। दूसरी ओर भले ही पीएचई के पास बजट न हो लेकिन यह काम
मामला नंबर-1. बंगला चौराहा से अशोकनगर मार्ग पर ग्राम पंचायत
गुपलिया के अंतर्गत एक हैण्डपंप है। जो कि नेहकाई जाने वाले रास्ते के जोड़ पर लगा हुआ है। करीब दस वर्ष पहले बंगला चौराहा से अषोकनगर के लिए नई सड़क बनी तो यह हैण्डपंप नीचे हो गया। गुपलिया के युवा सेतूराजा ने बताया कि यहां राहगीर रुक कर पानी पीते हैं। इस हैण्डपंप का प्लेटफार्म पूरी तरह से जमीन में दबा हुआ है। हैण्डपंप से निकलने वाला पानी वापिस बोर में चला जाता है। रोजगार सहायक महेष यादव ने बताया कि सरपंच-सचिव सुनते नहीं है। गांव की समस्याओं के प्रति उनका ध्यान नहीं है।
मामला नंबर-2. बहादुरपुर-मुंगावली के बीच में काछी बरखेड़ा चौराहा
है। यहां से एक रास्ता पिपरई, एक रास्ता कुम्हर्रा बरी तक भी जाता है। इस चौराहे पर लगा हैण्डपंप राहगीरों की प्यास बुझाने का एकमात्र स्त्रोत है। इस हैण्डपंप का प्लेटफार्म भी टूटा हुआ है और पानी मौके पर ही जमा होता है। जनपद सदस्य परवीन बी ने बताया कि यहां बड़ी संख्य संख्या में मवेशी पानी की तलाश में घूमते हैं, हौदी भी नहीं बनी है। उन्होंने इसकी सूचना जनपद पंचायत मुंगावली में भी दी है। काछी बरखेड़ा के सचिव चंद्रकांत पटेल ने बताया कि उक्त हैण्डपंप हमारी ग्राम पंचायत की सीमा में नहीं आता है।

मामला नंबर-3. ग्राम पंचायत कुकावली के अंतर्गत अजा बस्ती खुशीपुरा है। यहां के शासकीय प्राथमिक विद्यालय के पास लगे हैण्डपंप के चारों ओर गंदा पानी भरा हुआ है। शाला प्रभारी नत्थू सिंह ने बताया कि हैण्डपंप के संबंध में एक बार ग्राम पंचायत को आवेदन दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत सचिव जयराम रजक ने बताया कि इस संबंध में कार्रवाई चल रही है। काछी बरखेड़ा चौराहे पर प्लेटफार्म के साथ हौदी भी बनवा रहे हैं।
ग्राम पंचायतें पंद्रहवें वित्त की 30 प्रतिशत राशि से करा सकती हैं। जिसमें करीब साढ़े आठ हजार रुपए का खर्च आता है। वहीं सेक्टर मेडिकल ऑफिसर डॉ. वायएस तोमर ने बताया कि पानी
दूषित होने से आंत संबंधी कई बीमारियां होता हैं। जिनमें सबसे प्रमुख उल्टी-दस्त है। यदि लगातार दूषित पानी का सेवन किया जाए तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
यह काम पीएचई का है, यदि उनके पास बजट नहीं है तो जहां-जहां हैण्डपंपों के प्लेटफार्म टूटे हुए हैं। वहां हम ग्राम पंचायतों को निर्देशित करते हैं कि टूटे हुए प्लेटफार्म है, वहां नए बनवाएं और मवेशियों के लिए हौदी भी बनवाएं।
इनका कहना है।
आलोक प्रताप इटौरिया,
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत मुंगावली

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