इंदौर: नौलखा क्षेत्र में वर्षों से संचालित निजी बस स्टैंड के बंद होने और उसे शहर सीमा पर शिफ्ट करने के फैसले से यहां की आर्थिक रफ्तार थम गई है. कभी यात्रियों से गुलजार रहने वाला यह इलाका आज वीरानी और बेरोजगारी की मार झेल रहा है.सितंबर 2025 में बस स्टैंड को नायता मूंडला स्थित नए आरटीओ के पास शिफ्ट करने का निर्णय स्थानीय व्यापारियों के लिए भारी पड़ गया. स्टैंड के आसपास मौजूद होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें, और छोटे वेंडर पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं, क्योंकि यात्रियों की आवाजाही खत्म हो गई है. जिस मार्केट में रोज सैकड़ों यात्रियों की आवाजाही से रौनक रहती थी, वहां आज सन्नाटा पसरा है. करीब 200 दुकानों का व्यापार लगभग ठप हो चुका है और दुकानदार दिनभर ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहते हैं. शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण यह प्रमुख केंद्र था, जिसका स्थानांतरण बाहरी इलाकों में होने से यात्रियों को शहर पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने इस फैसले से पहले यहां के व्यापारियों और उनके रोजगार पर पड़ने वाले असर का आकलन किया था? क्या वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास की कोई योजना बनाई गई? सूत्रों के मुताबिक अब इस मार्केट को तोड़ने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है. यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है, जहां बिना दूरदर्शिता के लिया गया फैसला सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट बन गया है. व्यापारी मांग कर रहे हैं कि इस खाली पड़ी जमीन पर जल्द कोई नया प्रोजेक्ट लाया जाए, ताकि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट सकें.
इनका कहना है…
पहले हजार रुपए रोज कमा लेते थे, अब सौ-डेढ़ सौ रुपए की बिक्री हो गई तो समझो बहुत हो गई. यहां पर कोई स्टैंड या कोई प्रोजेक्ट आ जाए तो सब का रोजगार चल पड़े.
– श्रीकांत वर्मा
यहां बस स्टैंड ही आना चाहिए क्योंकि यह क्षेत्र उसके लायक है आने वाले सिंहस्थ के लिए भी यह स्थान उचित रहेगा. इससे तीन चार सौ दुकानों का रोजगार चल पड़ेगा.
– देवीलाल सुरागे
दुकानदारों का तो रोजगार ठप है ही, यहां से चलने वाले ऑटो भी घंटों यात्रियों के लिए खड़े रहते हैं, इस स्थान से जुड़े सभी लोग रोजगार को लेकर परेशान हैं.
– अजय चितावले
