
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक को आदेश के अनुरूप डीसीआरजी (डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी) की 10 लाख रुपए की राशि का भुगतान करें। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने यह भी पूछा है कि डीसीआरजी की बढ़ी हुई राशि क्यों नहीं दी जा रही है। इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलगुरू, कुलसचिव और कंट्रोलर ऑफ एकाउंट्स को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
दरअसल यह मामला जेएनकेविवि जबलपुर से सेवानिवृत्त सीनियर साइंटिस्ट डॉ. हरिशंकर राय की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा, अंजना श्रीवास्तव एवं अमित रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता जनवरी 2023 में सेवानिवृत्त हुआ और उसके बाद सीपीएफ के अलावा उन्हें कोई राशि नहीं दी गई। राज्य शासन ने अक्टूबर 2017 को एक आदेश जारी कर डीसीआरजी की राशि 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दी है। जीवाजी, रानी दुर्गावती विवि, इंदिरा गांधी कृषि विवि सहित प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में बढ़ी हुई राशि दी जा रही है, लेकिन जेएनकेविवि में नहीं दी जा रही है।
