विकसित भारत के लिए संवैधानिक मूल्यों से निर्देशित सामूहिक प्रयास जरूरी: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (वार्ता) उपराष्ट्रपति ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए संवैधानिक मूल्यों से निर्देशित सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि एक विकसित भारत समावेशी, समतामूलक, नवाचारी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों में निहित होना चाहिए।

संवैधानिक नैतिकता के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को संवाद, बहस और रचनात्मक चर्चा के माध्यम से कार्य करना चाहिए। श्री राधाकृष्णन अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को यहां डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में “डॉ. अंबेडकर एक राष्ट्र निर्माता के रूप में: विकसित भारत की ओर मार्ग” विषय पर दूसरा डॉ. अंबेडकर स्मारक व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संसदीय चर्चाओं का परिणाम व्यवधानों के बजाय निर्णयों के रूप में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यवाही में पूरी जानकारी के तथा सम्मानजनक जुड़ाव महत्वपूर्ण है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस व्याख्यान कार्यक्रम से पहले उन्होंने इस केंद्र में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत, तथा विद्वान, गणमान्य व्यक्ति और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की आकांक्षा के लिए संवैधानिक मूल्यों से निर्देशित सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत समावेशी, समतामूलक, नवाचारी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों में निहित होना चाहिए।

डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े ‘पंच-तीर्थ’ के विकास पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये स्थल भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के शाश्वत स्रोत हैं। उन्होंने नागरिकों से एक न्यायसंगत और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया, जो डॉ. अंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल के वर्षों में समावेशी विकास, वित्तीय सशक्तिकरण और पिछड़े क्षेत्रों के उत्थान के उद्देश्य से शुरू की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख किया, और कहा कि ये प्रयास डॉ. अंबेडकर के आदर्शों के अनुरूप हैं।

अंबेडकर जयंती के साथ-साथ तमिल नव वर्ष और बैसाखी जैसे त्योहारों पर शुभकामनाएं देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर को आधुनिक भारत के महानतम शिल्पकारों में से एक और एक सच्चे राष्ट्र निर्माता के रूप में वर्णित किया, जिनका योगदान आज भी गणतंत्र का मार्गदर्शन कर रहा है।

संविधान के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका का संदर्भ देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के दौरान अपने नेतृत्व के माध्यम से, उन्होंने एक ऐसे समावेशी भारत की नींव रखी जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। उपराष्ट्रपति नेलैंगिक समानता पर डॉ. अंबेडकर के प्रगतिशील दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया, और समाज की प्रगति के मापदंड के रूप में महिलाओं के सशक्तिकरण पर उनके ज़ोर को याद किया।

 

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