
वॉशिंगटन | अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई 21 घंटे की मैराथन शांति वार्ता पर बड़ा बयान दिया है। वेंस ने कहा कि संघर्ष खत्म करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं और ईरान कुछ हद तक अमेरिकी शर्तों की ओर झुका है। हालांकि, यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Enrichment) के अधिकार को छोड़ने जैसे प्रमुख मुद्दों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। वेंस ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ तय कर दी हैं और अब बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से तेहरान की है।
परमाणु हथियारों पर कड़ा रुख
फॉक्स न्यूज से बात करते हुए वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन किया और जोर देकर कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के पास परमाणु बम आता है, तो वह वैश्विक स्तर पर ‘आर्थिक आतंकवाद’ फैलाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है। वेंस ने बताया कि यह दशकों में पहली बार था जब दोनों देशों की सरकारें इतने उच्च स्तर पर आमने-सामने बैठी थीं, जिसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ईरान के फैसले का इंतजार
शांति वार्ता के बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त होने पर वेंस ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास फैसला लेने की पूर्ण शक्ति नहीं थी। उन्हें शर्तों की मंजूरी के लिए वापस तेहरान जाकर सुप्रीम लीडर से अनुमति लेनी होगी। इस बीच, अमेरिका में बढ़ती ऊर्जा कीमतों पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे तेल और गैस की दरों को कम करने के लिए युद्ध विराम की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह शांति की दिशा में हाथ बढ़ाता है या नहीं।
