आयुष्मान कार्ड की रकम की लालच में गई युवक की जान

सतना : देवेंद्रनगर पन्ना निवासी युवक का पथरी का ऑपरेशन शहर के पाठक हास्पिटल में हुआ. लेकिन ऑपरेशन के दौरान उसकी एक किडनी क्षतिग्रस्त हो गई. हालत गंभीर होने पर मरीज को रीवा रेफर कर दिया गया. लेकिन 5 दिन तक चले उपचार के बाद उसकी मौत हो गई. इस घटना ने परिजनों को इस कदर आक्रोशित कर दिया कि वे सडक़ पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए. नतीजतन शाम से लेकर देर रात तक राष्ट्रीय राजमार्ग आंशिक तौर पर बाधित होता रहा. 5 घंटे से अधिक समय तक जारी रहे विरोध प्रदर्शन के बाद जांच कार्रवाई का आश्वासन और हास्पिटल प्रबंधन द्वारा पीडि़त परिजनों को क्षूितपर्ति राशि दिए जाने पर किसी तरह सहमति बन पाई.

प्राप्त जानकारी के अनुसार देवेंद्र नगर पन्ना निवासी रवि रजक पिता स्व. गिरधारीलाल रजक को पेसाब नली में पथरी की समस्या थी. जिसके चलते परिजन उसे लेकर शहर के पाठक हास्पिटल में पहुंचे. जहां पर जांच करने के बाद वहहां पर पदस्थ चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह द्वारा पथरी के ऑपरेशन की सलाह दी गई. चूंकि परिजनों के पास आयुष्मान कार्ड था लिहाजा अस्पताल प्रबंधन ने फौरन ही रवि का भर्ती कर ऑपरेशन कराने के लिए कहा. परिजनों ने भी सोचा कि कहीं बाहर जाकर परेशान होने से बेहरत है कि पथरी जैसा छोटा सा ऑपरेशन सतना में ही करा लिया जाए. लिहाजा रवि को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

परिजनों ने बताया कि 6 अप्रैल को रवि का ऑपरेशन हुआ. लेकिन सर्जरी करने वाले चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह की गलती से रवि की बाई किडनी में भी चीरा लगा गया. जिसके चलते उसकी किडनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. अपनी गलती को छिपाने के लिए चिकित्सक द्वारा धागे से बांध कर किसी तरह काम चलाने की कोशिश की गई. लेकिन इसके बावजूद भी जब रवि की हालत बिगड़ती रही तो उसे सुपर स्पेशियल्टी हास्पिटल रीवा के लिए रेफर कर दिया गया. जहां पर पहुंचते पहुंचते रवि का शरीर पूरी तरह से नीला पड़ चुका था. हलांकि मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर उपचार शुरु हुआ. लेकिन रवि की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. वहीं रविवार की देर रात उसने दम तोड़ दिया.

इस घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में आक्रोश पनपने लगा. इसी कड़ी में सोमवार की शाम आधा सैकड़ा की संख्या में परिजन बीटीआई मैदान से लगे राष्ट्रीय राजमार्ग पर एकत्रित हो गए. आक्रोशित परिजनों ने मार्ग को बाधित करते हुए विरोध प्रदर्शन करना शुरु कर दिया. घटना की जानकारी मिलते ही कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए. लेकिन परिजनों के आक्रोश के आगे पुलिस की एक न चली. मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ देर बाद ही सीएसपी देवेंद्र सिंह चौहान, कोतवाली थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी, सिविल लाइन थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सहित खासी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया. पुलिस अधिकारियों और परिजनों के बीच काफी देर तक चर्चाओं का दौर चला. लेकिन समझौता होता नजर नहीं आया. इस घटना के चलते राजमार्ग से होकर गुजरने वाले लोग किसी तरह सहम सहम कर आगे बढ़ते नजर आए.
  रास्ते में रोकी गई एंबुलेंस
युवक की मौत से दुखी परिजन राजमार्ग से लेकर पाठक हास्पिटल के बीच विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसके साथ ही परिजन मृतक युवक के शव का सतना पहुंचने का इंतजार भी कर रहे थे. लेकिन जैसे ही परिजनों को इस बात की जानकारी मिली कि रीवा से सतना आ रही एंबुलेंस को पुलिस द्वारा बार बार रोकर बाइपास से होकर पन्ना जाने का दबाव बनाया जा रहा है. वैसे ही परिजनों का आक्रोश और भडक़ गया. मामले की नजाकत को देखते हुए पुलिस कर्मी जैकेट और हेलमेट से लैस भी हो गए. हलांकि इससे पहले की बात टकराव की स्थिति तक पहुंच पाती पुलिस और परिजनों ने मिलकर उसे संभाल लिया.
हास्पिटल का लाइसेंस हो निरस्त
स्थिति बिगड़ती देख तहसीलदार रघुराजनगर भी मौके पर पहुंच गए और परिजनों से चर्चा की. परिजनों ने सिलसिलेवार तरीके से पाठक हास्पिटल, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. राजीव पाठक और डॉ. रवि सिंह की लालच भरी कार्यशैली का ब्योरा सामने रखा. परिजनों ने यह भी बताया कि 4 दिन पहले ही हास्पिटल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों के विरुद्ध शिकायत सीएमएचओ से की गई थी. परिजनों ने तहसीलदार को वह वीडियो भी दिखाया जिसमें चिकित्सक द्वारा अपनी गलती मानकर माफी मांगी जा रही है. वीडियो में चिकित्सक द्वारा पीडि़त परिवार का पूरा खर्च वहन करने की बात का भी दावा किया गया. अपनी बात रखने के बाद परिजनों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए. इसी कड़ी में हास्पिटल का लाइसें भी निरस्त कराया जाए.
 मांगी 20 करोड़ की क्षतिपूर्ति
इसके साथ ही परिजनों ने कहा कि मृतक युवक अपने घर में अकेला कमाने वाला था. पिता का निधन पहले ही हो चुका है. अब घर में केवल मृतक युवक की मां और बहन ही बची हैं. जिसे देखते हुए पीडि़त परिवार को 20 करोड़ रु की क्षतिपूर्ति दिलाई जाए. यह सुनकर तहसीलदार ने परिजनों के पास संबल उपलब्ध होने के बारे में पूछा और साथ ही आश्वस्त किया की शासन की ओर से जो भी मदद हो सकेगी उसे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. लेकिन परिजनों द्वारा हास्पिटल प्रबंधन से जो 20 करोड़ रु की क्षतिपूर्ति मांगी जा रही है वह व्यवहारिक नहीं है. तहसीलदार द्वारा परिजनों को सोच विचार कर मांग रखने की बात कहीं गई. लेकिन इसी बीच कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासन पर हास्पिटल प्रबंधन का पक्ष लेने का आरोप लगा दिया और वार्ता एक बार फिर से बेपटरी हो गई.
 पांच लाख पर बनी सहमति
परिजनों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस प्रशासन के बीच तनातनी और समझाइस का दौर घंटो जारी रहा. कभी लगता था कि बात बन जाएगी तो कभी परिजन आक्रोशित होकर राजमार्ग पर विरोध करने पहुंच जाते. यह सिलसिला रात 11 बजे तक ऐसे ही चलता रहा. हलांकि शाम से हास्पिटल प्रबंधन ने स्वयं को भूमिगत कर रखा था. जिसके चलते उन तक बात नहीं पहुंच पा रही थी. लेकिन जब पुलिस प्रशासन का दबाव बढ़ा तो हास्पिटल प्रबंधन ने भी पुलिस प्रशासन का सहयोग करने में ही अपनी भलाई समझी. काफी देर तक चली समझाइस के बाद रात के साढ़े 11 बजे इस बात पर सहमति बनती नजर आई  कि हास्पिटल प्रबंधन द्वारा पीडि़त परिजनों को 5 लाख रु की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. सहमति बनने पर हास्पिटल प्रबंधन से संबंधित चिकित्सक उक्त राशि को परिजनों को फौरन देने पर राजी हो गए.

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