मुंबई | भारतीय संगीत जगत का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए शांत हो गया। दिग्गज गायिका आशा भोसले को सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को मुंबई पुलिस ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया, जिसके बाद उनके बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ से शुरू हुई, जिसमें हजारों प्रशंसकों की भीड़ अपने प्रिय ‘आशा ताई’ की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ी। इस भावुक क्षण के साथ ही भारतीय पार्श्व गायन के एक गौरवशाली युग का औपचारिक रूप से अंत हो गया।
आशा ताई के अंतिम दर्शन के लिए कला, खेल और राजनीति जगत की तमाम बड़ी हस्तियां उनके निवास पर पहुंचीं। अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान और रणवीर सिंह सहित कई फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए इसे संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया। महाराष्ट्र सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक की घोषणा की और उनके योगदान को जीवंत रखने के लिए उनके नाम पर एक विशेष संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। हर किसी की आंखों में आंसू थे, जो उनकी लोकप्रियता और व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाते हैं।
आशा भोसले का करियर संगीत की दुनिया में एक महान मिसाल है, जो करीब 82 वर्षों तक फैला रहा। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गीतों को अपनी जादुई आवाज दी। ‘पिया तू अब तो आजा’ से लेकर ‘दम मारो दम’ जैसे कालजयी गीतों ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उन्हें पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था। उनकी आवाज में जो खनक और वर्सेटाइल अंदाज था, उसने उन्हें हर पीढ़ी का पसंदीदा बनाया। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली विरासत सदियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।

