नई दिल्ली | देश के लगभग 45 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 60 लाख पेंशनर्स को महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। आमतौर पर मार्च के आखिरी सप्ताह तक होने वाला यह ऐलान इस बार दो हफ्तों से ज्यादा पिछड़ चुका है। कर्मचारी संगठनों ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के अनुसार, डीए 54 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत होने की उम्मीद है। देरी के कारण कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है क्योंकि उन्हें अप्रैल की सैलरी के साथ जनवरी 2026 से अब तक के एरियर (Arrears) मिलने की आस थी।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार डीए की घोषणा में देरी के पीछे प्रशासनिक कारण और 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के ढांचे की ओर बढ़ता ट्रांजिशन हो सकता है। बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, नए पे-स्ट्रक्चर और मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बीच सही तालमेल बिठाने के कारण फाइल अटकी हो सकती है। सरकार को महंगाई भत्ते की मांग और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि देरी का कोई बड़ा नकारात्मक कारण नहीं है और जल्द ही कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है।
कर्मचारी संगठनों की एक प्रमुख मांग 50 प्रतिशत डीए को मूल वेतन (Basic Pay) में मर्ज करने की भी रही है, ताकि बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके। हालांकि, केंद्र सरकार ने पूर्व में स्पष्ट कर दिया था कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वर्तमान में सारा ध्यान 4 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी पर टिका है। कर्मचारी संघों का कहना है कि हर साल अप्रैल के पहले हफ्ते तक तीन महीने का एरियर मिल जाता था, लेकिन इस बार की देरी ने बजट गणना को प्रभावित किया है। अब सबकी निगाहें अगले बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक पर टिकी हैं।

