
सीहोर। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई. स्लॉट बुकिंग के लिए किसान दिनभर भटकते रहे, लेकिन सर्वर ठप होने से प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी. दूसरी ओर, बारदाने की भारी कमी के चलते प्रशासन ने खरीदी को सीमित करते हुए पहले दिन केवल 5 केंद्रों पर 1000 क्विंटल प्रतिदिन की सीमा तय कर दी है, जिससे रिकॉर्ड पंजीयन के बीच किसानों की चिंता बढ़ गई है.
जिले में 9 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की शुरुआत हो रही है, लेकिन शुरुआत से पहले ही व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं. बुधवार को किसान स्लॉट बुकिंग के लिए घंटों तक परेशान होते रहे, लेकिन सर्वर काम नहीं करने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा. कई किसानों ने बताया कि सुबह से लेकर दोपहर तक वे केंद्रों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन स्लॉट खुल ही नहीं पाए.
तकनीकी खामियों के साथ-साथ बारदाने की कमी ने खरीदी व्यवस्था को और अधिक प्रभावित कर दिया है. वर्तमान में जिले को लगभग 28 हजार गठानों की आवश्यकता है, लेकिन महज 12,500 गठानें ही उपलब्ध हैं. यानी करीब 60 प्रतिशत बारदाना अभी तक नहीं पहुंच पाया है. इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने खरीदी की रफ्तार को सीमित रखने का फैसला लिया है.
प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी आकाश चंदेल का कहना है कि 9 अप्रैल से 5 केंद्रों पर खरीदी शुरू की जा रही है और बाकी केंद्रों पर भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि बारदाने की आपूर्ति बढऩे और तकनीकी समस्याओं के समाधान के बाद खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी.
फिलहाल, खरीदी के पहले ही दिन सामने आई समस्याओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो गेहूं खरीदी प्रक्रिया और अधिक प्रभावित हो सकती है.
अधिकतम 1 हजार क्विंटल गेहूं खरीदने की सीमा
गुरुवार से जिले के केवल 5 खरीदी केंद्रों—मंडी वेयरहाउस, तकीपुर, तिलहन संघ, मार्केटिंग आष्टा और भैरूंदा राला—पर ही खरीदी शुरू की जाएगी. इन सभी केंद्रों पर प्रतिदिन अधिकतम 1000 क्विंटल गेहूं खरीदने की सीमा तय की गई है. शेष 235 केंद्रों पर 10 अप्रैल से खरीदी शुरू करने का दावा किया जा रहा है, हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए इस पर भी संशय बना हुआ है. गौरतलब है कि खरीदी प्रक्रिया में इस बार एक बड़ा बदलाव भी किया गया है. अब हर केंद्र पर प्रतिदिन केवल 1000 क्विंटल गेहूं खरीदा जाएगा, जबकि पहले यह सीमा जिला स्तर पर तय होती थी. अब यह नियंत्रण प्रदेश स्तर से किया जा रहा है. इससे खरीदी की गति धीमी रहने की संभावना है और किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
इस बार गेहूं बेचने वाले किसानों का रिकार्ड पंजीयन
इस बार जिले में गेहूं बेचने के लिए किसानों का पंजीयन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. वर्ष 2024 में जहां 90,800 किसानों ने पंजीयन कराया था, वहीं 2025 में यह संख्या 88,292 रही. इस साल 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,02,485 तक पहुंच गया है. ऐसे में सीमित खरीदी व्यवस्था के चलते किसानों की उपज बेचने में देरी होना तय माना जा रहा है. शासन ने पहले दिन छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने की बात कही है. हालांकि इससे बड़े किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए और अधिक इंतजार करना पड़ेगा. आने वाले दिनों में केंद्रों पर भीड़ और दबाव बढऩे की आशंका भी जताई जा रही है.
