ईरान ने उसके परमाणु केंद्रों पर हमले के लिए संयुक्त राष्ट्र एवं आईएईए को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की

तेहरान, 07 अप्रैल (वार्ता) ईरान ने अपने सुरक्षित परमाणु केंद्रों पर हुए सिलसिलेवार सशस्त्र हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है और संयुक्त राष्ट्र संघ तथा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद के सदस्यों और आईएईए के महानिदेशक को लिखे एक पत्र में मुख्य परमाणु स्थलों पर हुए हमलों को ‘गंभीर तनाव’ पैदा करने वाला बताया है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कानून दोनों के लिए खतरा है।

पत्र में अंतर्राष्ट्रीय निकायों पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए संभावित रेडियोधर्मी खतरों की भी चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही आईएईए सुरक्षा मानकों के तहत ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है। तीन अप्रैल की तारीख वाले इस पत्र में पिछले नौ महीनों के दौरान ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे पर हुए कथित हमलों का विवरण दिया गया है। इसमें नतांज केंद्र, खोंदाब-अराकल स्थित हैवी वॉटर उत्पादन संयंत्र और बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए हमले शामिल हैं। श्री अराघची ने चेतावनी दी कि इस तरह के हमलों के ‘गंभीर मानवीय और पर्यावरणीय परिणाम’ हो सकते हैं और पूरे क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। ईरानी विदेश मंत्री ने पत्र में लिखा है, “नौ महीने की अवधि के भीतर, परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के संरक्षक अमेरिका और एनपीटी के दायरे से बाहर रहने वाले इजरायल ने ईरान के खिलाफ दो बार युद्ध छेड़ा हैं। दोनों ही मामलों में, ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर हमले और बमबारी की गई। बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और इसके महानिदेशक इन अवैध हमलों की निंदा करने तक में विफल रहे हैं।”

पत्र में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास कई हमलों और यूरेनियम प्रसंस्करण स्थलों पर हमलों का जिक्र किया गया है। मंत्री ने इन हमलों की भारी वृद्धि पर चिंता जताते हुए इन्हें अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन बताया है। श्री अराघची ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएईए पर हमलों की निंदा न करने का आरोप लगाते हुए तर्क दिया कि उनकी चुप्पी ने हमलावरों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों और जिनेवा कन्वेंशन के 1977 के अतिरिक्त प्रोटोकॉल के उल्लंघन का भी हवाला दिया, जो परमाणु प्रतिष्ठानों को हमले से बचाते हैं।

ईरानी मंत्री ने आईएईए महानिदेशक की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक की और ऐसे बयान दिए जो ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग का संकेत देते हैं। पत्र में कहा गया है, “ऐसी स्थितियों के परिणामस्वरूप परमाणु अप्रसार व्यवस्था के प्रति विश्वास में भारी कमी आई है।” श्री अराघची ने ईरान का विरोध दर्ज कराते हुए आग्रह किया कि इस पत्र को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दस्तावेज़ और आईएईए के आधिकारिक दस्तावेज़ के रूप में प्रसारित किया जाए। यह पत्र क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिसमें ईरान ने इस बात पर जोर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम विशेष रूप से आईएईए के व्यापक सुरक्षा ढांचे के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि अंतर्राष्ट्रीय निकाय चुप रहे, तो सदस्य देशों का संयुक्त राष्ट्र और एजेंसी से विश्वास उठ सकता है।

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