
सिंगरौली। जिले के कोल खदान क्षेत्र में स्थित एनसीएल के बी-ब्लॉक गोरबी कांटा (वजन माप केंद्र) पर कोयले की तौल प्रक्रिया को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, यहां तौल व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे संबंधित व्यवस्थाओं की निष्पक्षता पर ध्यान आकर्षित हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों का कहना है कि कांटा संचालन के दौरान तकनीकी प्रक्रियाओं की सटीकता को लेकर शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वाहनों में लदे कोयले के वास्तविक वजन और दर्ज किए जा रहे वजन के बीच अंतर की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय जानकारों का यह भी कहना है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के चलते तौल प्रणाली की नियमित निगरानी और सत्यापन आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या गड़बड़ी की संभावना को रोका जा सके।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और संबंधित व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते तौल प्रणाली की जांच और आवश्यक सुधार किए जाते हैं, तो पारदर्शिता और विश्वास को और मजबूत किया जा सकता है।
