
शाजापुर। कोरोना महामारी के कारण वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार देश की 16वीं जनगणना का शंखनाद हो चुका है, वर्ष 2011 के बाद होने जा रही ये जनगणना पहले हुई समस्त गणमनाओं से अलग होने वाली है, क्योंकि ये पूरी तरह डिजिटल होगी. 1 मई 2026 से इस महाभियान की शुरुआत होगी.
इस दौरान प्रशासन घर घर पहुंचकर न सिर्फ आबादी, बल्कि जीवन स्तर, आवास, सुविधाओं और संसाधनों से जुडी विस्तृत जानकारी जुटाएगा. इस बार जनगणना केवल सिर गिनने तक सीमित नहीं रहेगी, हर परिवार की पूरी कुंडली तैयार की जाएगी. कागज कलम की जगह मोबाइल एप से डेटा फीडिंग होगा और पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, जनगणना के डिजिटल स्वरूप के लिए तीन विशेष एप विकसित किए गए हैं.
हर पहलू की होगी पड़ताल…
प्रथम चरण में 33 सवाल पूछे जाएंगे, इनमें मकान, भवन नंबर, फर्श, दीवार, छत की सामग्री मकान का उपयोग, हालत और स्वामित्व परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग साइकिल, बाइक, कार जैसे वाहनों की उपलब्धता टेलीफोन, स्मार्टफोन, इंटरनेट, कम्प्यूटर, रसोईघर, एलपीजी कनेक्शन, पेयजल स्रोत शौचालय की उपलब्धता व प्रकार, गंदे पानी की निकासी खाना पकाने का ईंधन, प्रकाश का स्रोत परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज परिवार का सामाजिक वर्ग एससी, एसटी अन्य जैसी सूक्ष्म जानकारियां शामिल हैं.
शिक्षकों के कंधों पर जिम्मेदारी
इस काम के लिए शिक्षकों के साथ अन्य शासकीय कर्मचारी को प्रगणक नियुक्त किया जाएगा, प्रगणक घर घर दस्तक देंगे और निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर जानकारी दर्ज करेंगे. प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो 1 मई से प्रथम चरण में घरों की गणना एवं नंबरिंग का कार्य शुरू किया जाएगा, जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों सहित अन्य शासकीय कर्मचारियों को प्रगणक बनाया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित तहसीलदार तथा नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिका अधिकारी चार्ज अधिकारी रहेंगे.
एप से किया जाएगा जनगणना कार्य…
जनगणना के लिए तीन एप का उपयोग किया जाएगा, इसमें हाउसिंग ऑपरेशन एप से मकानों का सूचीकरण और गणना होगी. जनसंख्या गणना एप के जरिए परिवार और लोगों का विवरण दर्ज किया जाएगा. डीएलएम एप से जीपीएस आधारित डिजिटल मैप पर ब्लॉक सीमाएं कैप्चर की जाएंगी. इस डिजिटल सिस्टम के चलते आंकड़ों के प्रकाशन में लंबा इंतजार नहीं करना होगा. वहीं सीएमएमएस पोर्टल से उच्च स्तर पर निगरानी होगी, जिससे गलती की गुंजाइश न के बराबर रहेगी.
मकानों पर लगेगी डिजीटल नंबर प्लेट…
नपा सीएमओ भूपेंद्र दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2011 में जनगणना के दौरान मकान पर नंबरिंग की गई थी, लेकिन इसके बाद जनगणना नहीं होने से नंबरिंग नहीं हो पाई है. वर्तमान में नगर में जनगणना मकान सूचीकरण का कार्य चल रहा है. इस दौरान मकानों पर नंबर डाले जा रहे हैं. प्रदेश के कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत मकानों पर डिजिटल नंबर प्लेट लगाई जा रही है. इसमें क्यूआर कोड भी रहेगा जिस पर घर की जानकारी होगी. यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो आगामी समय में शाजापुर में भी घरों पर डिजीटल नंबर प्लेट लगाई जाएगी.
