
खण्डवा। ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान-2.0 की सफलता और पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। सोमवार को जनपद पंचायत खण्डवा के सभाकक्ष में आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर के दौरान कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी कि जलग्रहण संरचनाओं के फोटो अपलोड करने में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या तकनीक का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने पोर्टल पर एआई आधारित या फर्जी फोटो अपलोड किए, तो संबंधित के विरुद्ध सीधे कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान कलेक्टर श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि पोर्टल पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जलग्रहण संरचना निर्माण के पूर्व की स्थिति और निर्माण पूर्ण होने के बाद की स्थिति, दोनों के फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि एक स्ट्रक्चर का फोटो दोबारा उपयोग न हो और सभी तस्वीरें वास्तविक स्थल की ही होनी चाहिए। इस दौरान कलेक्टर की सक्रियता का आलम यह रहा कि उन्होंने केवल मौखिक निर्देश नहीं दिए, बल्कि मौके पर ही पंचायत सचिवों से जनपद कार्यालय के बाहर बनी 10 जलग्रहण संरचनाओं के फोटो प्रयोग के तौर पर अपने समक्ष अपलोड करवाकर उनकी कार्यक्षमता को परखा।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ डॉ नागार्जुन बी गौड़ा सहित विभिन्न जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्राम पंचायतों के सचिव और ग्राम रोजगार सहायक प्रमुख रूप से उपस्थित थे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जल संचय के लिए जिले में जो संरचनाएं निर्मित की गई हैं, उनका डेटा शत-प्रतिशत सटीक और वास्तविक हो, ताकि अभियान के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके।
