विधानसभा चुनाव और उपचुनावों के लिए निर्देश जारी , विज्ञापनों का ‘पूर्व-प्रमाणीकरण’ अनिवार्य

नयी दिल्ली, 06 अप्रैल (वार्ता) चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों और छह राज्यों में उपचुनावों के लिए विज्ञापन संबंधी आचार संहिता को लेकर कड़े निर्देश जारी किये हैं। आयोग के अनुसार, असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा की खाली सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए भी अब विज्ञापनों का ‘पूर्व-प्रमाणीकरण’ अनिवार्य होगा।

सोमवार को जारी प्रेस नोट में आयोग ने यह भी साफ किया है कि यह निर्देश प्रिंट मीडिया के अलावा ई-पेपर्स और सोशल मीडिया कंटेंट पर भी लागू होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जायेगी। चुनाव आयोग ने प्रेस नोट में निर्देश दिया है कि मतदान के दिन और उससे ठीक एक दिन पहले कोई भी राजनीतिक विज्ञापन तब तक प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा, जब तक कि उसे मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) की ओर से मंजूरी न मिल चुकी हो। यह नियम उम्मीदवारों,

राजनीतिक दलों और किसी भी तीसरे पक्ष (संगठन या व्यक्ति) पर समान रूप से लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य मतदान से ऐन पहले ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान भ्रामक, आपत्तिजनक या भड़काऊ विज्ञापनों के प्रसार को रोकना है। चूंकि इस समय के दौरान प्रतिपक्षी दलों के पास ऐसे आरोपों का खंडन करने का समय नहीं होता, इसलिए चुनाव की शुचिता बनाये रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विज्ञापनों के लिए आवेदन प्रकाशन की प्रस्तावित तिथि से कम से कम दो दिन पहले जमा करना होगा। निर्दलीय उम्मीदवार जिला स्तरीय समिति को और पंजीकृत राजनीतिक दल राज्य स्तरीय समिति को आवेदन देंगे।

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