रिटायर हुए कर्मचारी, ठेके पर प्लांट; गंदे पानी की सप्लाई का खतरा

भोपाल:राजधानी में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. नगर निगम द्वारा स्थापित एक दर्जन से अधिक फिल्टर प्लांटों के बावजूद नागरिकों को शुद्ध पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है. पहले इन प्लांटों का संचालन निगम के कर्मचारियों द्वारा किया जाता था, जहां तीन पालियों में करीब 12 कर्मचारी एक प्लांट पर कार्यरत रहते थे.समय के साथ कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद नई भर्ती नहीं की गई और तीन साल पहले इन प्लांटों का संचालन ठेके पर दे दिया गया. वर्तमान में अधिकांश प्लांट निजी हाथों में हैं, जहां पहले की तुलना में काफी कम, लगभग 20 से 25 कर्मचारियों से ही काम लिया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों की कमी के कारण रात्रि पाली में निगरानी प्रभावित होती है, जिससे पानी में मिलाए जाने वाले केमिकल की मात्रा और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है. हाल ही में तालाब के पानी की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने का मामला भी सामने आया था.गर्मी के मौसम में जलस्तर घटने के साथ पानी में अशुद्धियां बढ़ जाती हैं. ऐसे में सामान्य केमिकल के अलावा हाइपो का उपयोग करना पड़ता है, जिससे पानी को शुद्ध किया जा सके। शहर के पंप हाउसों से इन फिल्टर प्लांटों तक पानी पहुंचाया जाता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करना चुनौती बनता जा रहा है.
बैरागढ़ में दो पंप हाउस, तीन फिल्टर प्लांट
करबला पंप हाउस मनुआभान टेकरी पर फिल्टर प्लांट
राजा भोज मूर्ति के पास पंप हाउस पुरानी फायर स्टेशन के पीछे फिल्टर प्लांट
कमला पार्क पंप हाउस बीएचईएल फिल्टर प्लांट
श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट
नर्मदा नदी पर पंप हाउस विधान सभा के सामने फिल्टर प्लांट
पुल पुख्ता पंप हाउस पुल पुख्ता फिल्टर प्लांट
कोलार डेम पंप हाउस कोलार डेम फिल्टर पलांट
केरवा डेम पंप हाउस केरवा डेम फिल्टर प्लांट
इनका कहना है
बड़े प्लांट ठेके पर दिए गए हैं यह बहुत पहले से चल रहे हैं. कर्मचारियों की कमी और भर्ती से संबंधित जानकारी आप निगम आयुक्त पूछें.
मालती राय, महापौर, नगर निगम भोपाल
कोई भी निजी संस्था किसी भी तरीके से ना तो सही सेवा देती है. केवल उसका लाभ कमाना उद्देश्य होता है और कर्मचारियों का शोषण करना. कोई भी दुर्घटना होने पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है. जिस तरह से इंदौर में दूषित पानी की घटना में हुआ. नागरिक टैक्स से भी पिसता है और जिंदगी से भी.
विभा पटेल, पूर्व महापौर, नगर निगम भोपाल

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