तेहरान | ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक चौंकाने वाली खुफिया रिपोर्ट सामने आई है, जिसने वाशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Hormuz Strait) को पूरी तरह बंद करने के बजाय इसे “थ्रॉटल” कर रहा है। इसका अर्थ है कि ईरान अपनी सुविधानुसार इस रास्ते को खोलता और बंद करता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में अनिश्चितता बनी हुई है। दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस पर नियंत्रण पाकर ईरान ने न केवल तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर भारी आर्थिक दबाव भी बना दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि होर्मुज को खोलना उनके लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं है और वे जल्द ही तेल की आपूर्ति सामान्य कर देंगे। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ और ‘इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप’ के निदेशक अली वैज इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियारों से रोकने की कोशिश में अनजाने में “मास डिसरप्शन” (बड़े पैमाने पर व्यवधान) का एक ऐसा हथियार थमा दिया है, जो किसी भी मिसाइल से ज्यादा घातक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब इस समुद्री रास्ते को अपनी शर्तों पर संचालित कर रहा है, जिससे अमेरिकी नौसेना के लिए इसे बलपूर्वक खोलना बेहद जोखिम भरा हो गया है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस मार्ग पर माइंस बिछाने और चुनिंदा देशों के जहाजों को ही गुजरने की अनुमति देने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। पूर्व सीआईए डायरेक्टर बिल बर्न्स ने आशंका जताई है कि ईरान इस ताकत को आसानी से नहीं छोड़ेगा। संभावना जताई जा रही है कि युद्ध के बाद ईरान अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ‘ट्रांजिट टैक्स’ वसूलना शुरू कर सकता है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जहां युद्ध का मैदान केवल जमीन और आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को ईरान ने बंधक बना लिया है।

