पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराया काला साया, 40 दिनों से अधिक युद्ध खिंचने पर आसमान छू सकती हैं खाने-पीने की चीजों की कीमतें, एफएओ ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को लेकर दुनिया भर में आर्थिक चेतावनी जारी की है। एफएओ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक औसतन 128.5 अंक दर्ज किया गया, जो फरवरी की तुलना में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उछाल का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और ऊर्जा संकट को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष 40 दिनों की समयसीमा को पार कर जाता है, तो आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्यान्न की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं, जिससे विकासशील देशों में भुखमरी और महंगाई का संकट गहरा जाएगा।

एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने स्पष्ट किया है कि युद्ध लंबा खिंचने का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा। ईंधन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) महंगे होने के कारण किसानों का मुनाफा कम होगा, जिससे वे उत्पादन में कटौती करने या कम खाद का उपयोग करने पर मजबूर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लागत बढ़ने पर किसान कम रकबे में बुवाई करेंगे या ऐसी फसलों की ओर रुख करेंगे जिनमें उर्वरक की कम आवश्यकता हो। यह बदलाव न केवल वर्तमान वर्ष के लिए, बल्कि पूरे 2027 के लिए वैश्विक खाद्य आपूर्ति चक्र को प्रभावित करेगा। अनुमान है कि इस साल वैश्विक गेहूं उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 1.7 प्रतिशत घटकर 820 मिलियन टन रह सकता है, जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

खाद्य पदार्थों की श्रेणी में सबसे अधिक असर चीनी और वनस्पति तेलों पर देखा जा रहा है। मार्च में चीनी की कीमतों में 7.2% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि प्रमुख निर्यातक देश ब्राजील अब ऊंचे कच्चे तेल के दामों के कारण गन्ने का उपयोग चीनी के बजाय ‘इथेनॉल’ बनाने में अधिक कर रहा है। इसी तरह, बायोफ्यूल की मांग बढ़ने की उम्मीद में वनस्पति तेलों के दाम 5.1% तक बढ़ गए हैं। अमेरिका में सूखे और ऑस्ट्रेलिया में खाद की कमी के डर से गेहूं की कीमतें भी 4.3% तक चढ़ गई हैं। एफएओ ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट जल्द नहीं सुलझा, तो परिवहन और उर्वरक की बढ़ी हुई लागत दुनिया के गरीब और विकासशील देशों की ‘थाली’ पर सीधा प्रहार करेगी।

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