
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष एसटीएफ द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश की गई रिपोर्ट को रिकार्ड पर लिया गया। उसका अवलोकन करने पर पाया गया कि हेलमेट चैकिंग के दौरान पुलिस कर्मी से अभद्रता और वर्दी फाडऩे के आरोपी पूर्व महापौर सहित पांच आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर चार्जशीट पेश कर दी गई है। जबकि पुलिस कर्मी के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर में खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी गई है। न्यायालय ने उक्त जानकारी पर गौर करने के साथ ही याचिका का निराकरण कर दिया।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने जनहित याचिका में आरोप लगाया था कि पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थानान्तर्गत बल्देवबाग के समीप वाहन चेकिंग दौरान पुलिस कर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए रोका था। पूर्व महापौर अपना परिचय देते हुए पुलिस कर्मी के साथ अभद्रता करते लगे। इसके बाद समर्थकों के हुजूम एकत्र हो गया और पुलिस कर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। पूरी घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते ड्यूटी कर रहे पुलिस कर्मी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। जबकि दूसरी ओर पुलिस कर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। बावजूद इसके कि वायरल वीडियो में आरोपितों की शिनाख्त स्पष्ट थी।
यह था मामला-
यह विवाद 18 सितंबर, 2025 को हेलमेट चैकिंग के दौरान शुरू हुआ था, जब पुलिस कर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटना सामने आई थी। प्रारंभिक स्तर पर पुलिसकर्मी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को अज्ञात रखा गया था, लेकिन अधिवक्ता मोहित वर्मा की जनहित याचिका के बाद मामले की एसटीएफ जांच में सच्चाई सामने आई। अब यह स्पष्ट हो गया है कि शुरुआती कार्रवाई पर राजनीतिक दबाव का असर था, जो जांच के सामने टिक नहीं सका।
