पुल बनने तक मरना मना है! बकरी पुल टूटने से अंतिम विदाई भी हुई दूभर

सीहोर। शहर का ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन बकरी पुल अब केवल इतिहास के पन्नों में सिमटता नजर आ रहा है. वर्षों से यातायात का बोझ झेल रहे इस पुल को आखिरकार ऊंचा और चौड़ा बनाने के उद्देश्य से तोड़ा जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के अभाव ने आमजन की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं.

शहर के एक्सीलेंस स्कूल के समीप बना बकरी पुल हर साल बारिश के मौसम में यह पुल जलमग्न हो जाता था, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था. इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन द्वारा पुल का पुनर्निर्माण शुरू किया गया, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि पुल तो तोड़ दिया गया, लेकिन एप्रोच रोड या वैकल्पिक मार्ग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गइ.

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोगों को अपने दैनिक आवागमन के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है. वहीं कस्बा क्षेत्र के रहवासी विशेष रूप से प्रभावित हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक बन गई है.

सबसे संवेदनशील और चिंताजनक पहलू यह है कि इस अव्यवस्था के कारण अंतिम संस्कार और जनाजे तक ले जाना मुश्किल हो गया है. लोगों को दिवंगतों की अर्थी और जनाजे को दूसरे रास्तों से घुमाकर ले जाना पड़ रहा है, क्योंकि बकरी पुल की दूसरी तरफ छावनी विश्राम घाट है तो इंदौर नाके पर कब्रिस्तान है. ऐसे में भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तर पर परेशानी बढ़ रही है. इसी विडंबना को देखते हुए क्षेत्र में यह तंज सुनने को मिल रहा है कि पुल बनने तक मरना मना है. यह वाक्य भले ही व्यंग्यात्मक हो, लेकिन वर्तमान हालात की गंभीरता को बयां कर रहा है. स्थानीय लोगों में इस अव्यवस्था को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. उनका कहना है कि पुल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान जिला प्रशासन को पहले लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि आमजन को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े.

अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द एप्रोच रोड तैयार करे या अस्थायी पुल/मार्ग की व्यवस्था करे, जिससे लोगों को राहत मिल सके. साथ ही निर्माण कार्य में तेजी लाकर इसे शीघ्र पूर्ण करने की आवश्यकता भी जताई जा रही है, ताकि शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले इस मार्ग पर फिर से सुचारू आवागमन शुरू हो सके.

मजबूर लोगों ने सूखी पड़ी नदी से जाना शुरू किया

बीते एक पखवाड़े से बकरी पुल टूटने के बाद कई दुपहिया वाहन चालक सूखी पड़ी सीवन नदी के रास्ते से ही आवागमन कर रहे हैं. यह रास्ता न तो सुरक्षित है और न ही व्यवस्थित, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है. फिसलन भरी सतह और असमान जमीन के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन मजबूरी में लोगों को इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है.

 

 

 

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