क्या मिशन 28 का चेहरा बनने की कवायद में जुटे हैं अजय सिंह !

ग्वालियर चंबल डायरी हरीश दुबे। प्रदेश की कई कांग्रेसी सरकारों में मंत्री, शिवराज के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष और सात बार के विधायक अजय सिंह एक बार फिर ग्वालियर अंचल के दौरे पर हैं। वे अभी बीस रोज पहले ही इस अंचल के चार रोजा दौरे पर आए थे और अब आज दो अप्रैल को शिवपुरी में रहेंगे। खास बात यह है कि राहुल भैया के नाम से पहचाने जाने वाले अजय सिंह ने पिछले महीने ग्वालियर चंबल के बाद बुंदेलखंड की भी राजनीतिक यात्रा की थी। चूंकि इस अंचल में कांग्रेस की राजनीति में दिग्विजय, कमलनाथ और जीतू पटवारी के खेमे वर्चस्व बनाए हुए हैं लिहाजा विंध्य के इस कद्दावर नेता द्वारा चंबल की सियासत में स्पेस बनाने की कवायद राजनीति के जानकारों को चौंका रही है। कांग्रेसी दौर में प्रदेश की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह अपने इन हालिया दौरों में बार बार दोहरा रहे हैं कि 2028 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। उम्र के तकाजे के चलते दिग्विजय और नाथ भले ही 28 में सीएम पद की रेस में शामिल न हों लेकिन पटवारी और उमंग सिंघार स्पर्धा में डटे हैं। सूबाई राजनीति में बने रहने के लिए ही पटवारी यह कह चुके हैं कि दिग्विजय के रिटायर होने से खाली हो रही राज्यसभा सीट के लिए वे दावेदार नहीं हैं। पटवारी और सिंघार के समर्थक अप्रत्यक्ष रूप से अपने नेताओं को मिशन 28 का चेहरा मानते हैं और अजयसिंह की राजनीतिक यात्राओं का निहितार्थ भी यही माना जा रहा है। यही वजह है कि विंध्य के क्षेत्रीय नेता की छवि से आगे बढ़कर खुद को सम्पूर्ण प्रदेश के नेता के रूप में स्थापित करने के लिए वे अब बार बार चंबल और बुंदेलखंड के लिए दौड़ लगा रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने ग्वालियर चंबल के लगभग सभी जिलों को एक एक दिन दिया था। ग्वालियर कांग्रेस के भगवान सिंह यादव, बालेंदु शुक्ला, सतीश सिकरवार, लाखन सिंह यादव, सुरेन्द्र यादव जैसे तमाम बड़े नेताओं से घर जाकर मुलाकात की थी। अब यही किस्सा कल शिवपुरी में दोहराए जाने वाला है। जिलाध्यक्ष मोहित अग्रवाल से लेकर विधायक कैलाश कुशवाहा, पूर्व विधायक गणेश गौतम, विजयसिंह चौहान और प्रियंका शर्मा आदि दर्जनों नेताओं ने अलग अलग स्वागत जलसे रखे हैं।

यह शहर है अमन का, प्रशासन जुटा इंतजाम में

धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संवेदनाओं से जुड़े दो महत्वपूर्ण दिवस या त्यौहार एक ही दिन फंस जाएं तो पुलिस और प्रशासन की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। हालांकि अलग अलग धार्मिक आस्थाओं वाले दो त्यौहार एक ही दिन पड़ने के वाकये पहले भी हुए हैं और प्रशासन के इंतजाम मुस्तैद और कामयाब रहे। कुछ कुछ ऐसी ही परिस्थितियां कल गुरुवार, 2 अप्रैल को निर्मित हुई हैं। हनुमान जयंती भी है और 2 अप्रैल 2018 को एट्रॉसिटी एक्ट के विरोध में हुए जातीय दंगों की बरसी भी है। हर साल 2 अप्रैल के दिन ग्वालियर में पुलिस प्रशासन खासा सतर्क रहता है। शहर की संवेदनशील मानी जाने वाली बस्तियों में पुलिस की तैनाती के साथ सतर्कता बरती जाती है ताकि आठ साल पहले के त्रासद वाकये की पुनरावृत्ति न हो। हनुमान जयंती पर शहर से लेकर देहात तक के मंदिरों पर मेलों के आयोजन के चलते पुलिस को अलग से इंतजाम चाक चौबंद रखना पड़ेंगे। फिलहाल शहर का पुलिस अमला इन्हीं व्यवस्थाओं में जुटा है। शुकर है कि 2018 के बाद से हर साल ग्वालियर में 2 अप्रैल की तारीख अमन और भाईचारे से ही बीती है, ग्वालियर अमनपसंद मिजाज वाला शहर है, यह कल एक बार फिर से साबित होगा।

समर नाइट मेला का अब तक नहीं अता पता

ग्वालियर व्यापार मेला खत्म हुए महीना भर से ज्यादा वक्त होने को आया, इसके बाद गरीबों का मेला लग गया, वह भी उठ गया। अब मेला परिसर में दो और मेले चल रहे हैं, पहला पुस्तक मेला और दूसरा अग्नि सुरक्षा मेला। इन दोनों मेलों का व्यापार मेला प्राधिकरण से कोई ताल्लुक नहीं है। क्रमशः जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा लगाए इन मेलों में भीड़ आ रही है लेकिन मेला प्राधिकरण के तयशुदा कैलेंडर के मुताबिक लगाए जाने वाले समर नाइट मेला का अभी तक कोई अता पता नहीं है जबकि अप्रैल शुरू हो चुका है। समर नाइट मेला के लिए प्राधिकरण ने अभी तलक सींक भी नहीं धरी है। न तो व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन शुरू हुए हैं और न इस मेला के लिए जगह ही चिन्हित की गई है। पिछले कई बरस से लगते आ रहे समर नाइट मेला का प्रयोग सफल रहा है लेकिन सच्चाई यह है कि मेला प्राधिकरण ने इस आयोजन को कभी गंभीरता से नहीं लिया। महीना भर के इस आयोजन को औपचारिकता मानकर निपटा दिया जाता है। व्यापारियों ने अब इस मेला को गरिमामय रंग देने और तैयारी जल्द शुरू करने के लिए प्राधिकरण के सेक्रेट्री पर दवाब बनाया है।

कोविड काल जैसे हालात बनने की चिंता

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग लंबा खिंचने से समूचे देश की भांति ग्वालियर के लोग भी चिन्ता में हैं। रसोई गैस के दाम बढ़ने के साथ किल्लत भी बनी हुई है। प्रीमियम पेट्रोल के दामों में इजाफा हो ही चुका है। लोगों को कोविड काल जैसे हालात का डर सता रहा है हालांकि सरकार और प्रशासन के इंतजामों पर पूरा यकीन भी है।

Next Post

ऐतिहासिक: छतरपुर में विराजे 51 फीट के अष्टधातु महाबली, संतों के सानिध्य में प्रतिमा का अनावरण

Thu Apr 2 , 2026
छतरपुर। गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर छतरपुर की पावन धरा एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जानराय टोरिया में पिछले 10 दिनों से चल रहे भक्ति के महाकुंभ का चरमोत्कर्ष आज उस समय देखने को मिला, जब 51 फीट ऊंची अष्टधातु से […]

You May Like