ग्वालियर: दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को साल 1998 के एक एफडी में हेराफेरी मामले को लेकर दोषी करार देते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है, हालांकि सजा के तुरंत बाद उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई है।यह पूरा मामला उस समय का है जब भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे और उन पर अपने पिता के संस्थान के नाम पर कराई गई 10 लाख की एफडी के ब्याज को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निकालने का आरोप सिद्ध हुआ है।
अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश (120B) और धोखाधड़ी (420, 467, 468, 471) जैसी गंभीर धाराओं के तहत सजा सुनाई है, जिसमें उनके साथ बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी माना गया है।नियमतः दो साल से अधिक की सजा होने के कारण भारती की विधानसभा सदस्यता पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन यदि वे अगले 60 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील कर सजा पर स्थगन प्राप्त कर लेते हैं, तो उनकी विधायकी सुरक्षित रह सकती है।3 मार्च 2011 को बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी मामले को सामने लाए। सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभयखरे ने जांच की, जिसमें एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई।
2012 में भारती ने बैंक से एफडी की राशि मांगी, लेकिन ऑडिट आपत्ति के चलते भुगतान से इनकार किया गया। भुगतान न मिलने पर भारती उपभोक्ता फोरम पहुंचे, जहां से राहत नहीं मिली।
राज्य उपभोक्ता फोरम से राहत मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े ने आपराधिक मामला दर्ज कराने की पहल की। कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुआ।एमपी-एमएलए कोर्ट गठन के बाद मामला ग्वालियर पहुंचा और अक्टूबर 2025 में इसे दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट स्थानांतरित किया गया।
