जबलपुर: शहर की स्वच्छता और सुंदरता को एक नए स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन के द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के मार्गदर्शन में नगर निगम द्वारा एक व्यापक भिक्षुक मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम का उद्देश्य केवल सड़कों से भिक्षुकों को हटाना नहीं, बल्कि उन्हें पुनर्वास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
अभियान के तहत विशेष रूप से इन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है जिसमें गौरीघाट, तिलवाराघाट, उमाघाट, जिलेहरीघाट और दरोगाघाट, मुख्य चौराहे, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन परिसर आदि में कार्यवाही की जा रही है। इस दौरान नगर निगम की टीम न केवल समझाइश दे रही है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भिक्षुकों का वर्गीकरण भी कर रही है। जानकारी के अनुसार अभी तक 22 स्थानीय भिक्षुकों को सम्मानजनक जीवन के लिए शासकीय आश्रय स्थलों में शिफ्ट किया गया है, जहाँ उनके रहने और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। वहीं 7 बाहरी भिक्षुकों को काउंसलिंग के बाद उनके गृहग्राम भेजने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपने परिवार के साथ जुड़ सकें।
भिक्षा नहीं, स्वावलंबन दें…
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि भिक्षावृत्ति को बढ़ावा देना शहर के विकास में बाधक है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़कों पर भिक्षा न देकर इन व्यक्तियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि भिक्षा देना और लेना, दोनों ही कानूनन अपराध की श्रेणी में आते हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर धारा 223 के तहत 1000 रुपये का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। कार्यवाही के दौरान सिटी मिशन मैनेजर चंदन प्रजापति, सोनिका मातेले एवं सामुदायिक संगठक आदि उपस्थित रहे।
