जीएसटी दफ्तर में सहायक आयुक्त रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

रतलाम। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग के दफ्तर में मंगलवार को उस समय हडक़ंप मच गया, जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने अचानक छापेमारी करते हुए सहायक आयुक्त शंकर परमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अधिकारी को 1.5 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।

सीबीआई द्वारा 31 मार्च 2026 को दर्ज किए गए इस प्रकरण में सहायक आयुक्त शंकर परमार के साथ निजी व्यक्ति सुरेश मनसुखानी को भी आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के अनुसार, सीबीआई को 30 जनवरी 2026 को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सीजीएसटी रतलाम के अधिकारी एक फर्म के खिलाफ जीएसटी कार्रवाई नहीं करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता की फर्म जावरा क्षेत्र की बताई जा रही है।सीबीआई द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और सत्यापन में यह तथ्य सामने आया कि सहायक आयुक्त शंकर परमार ने एक बिचौलिए के माध्यम से शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद सीबीआई ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। मंगलवार को सीबीआई टीम ने सीजीएसटी कार्यालय रतलाम में जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को बिचौलिए के जरिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से विभाग में हडक़ंप की स्थिति बन गई और देर रात तक पूछताछ का दौर चलता रहा।

कार्रवाई के बाद सीबीआई टीम ने आरोपितों के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सख्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

सीबीआई को जनवरी में की थी शिकायत

 

सीबीआई को 30 जनवरी 2026 को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सीजीएसटी रतलाम के अधिकारी एक फर्म के खिलाफ जीएसटी कार्रवाई नहीं करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता की फर्म जावरा क्षेत्र की बताई जा रही है। सीबीआई द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और सत्यापन में यह तथ्य सामने आया कि सहायक आयुक्त शंकर परमार ने एक बिचौलिए के माध्यम से शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके बाद सीबीआई ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।

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