मनुस्मृति को हाईकोर्ट में चुनौती, प्रतिबंधित करने की मांग

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में लांजी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने मनुस्मृति ग्रंथ के विरुद्ध जनहित याचिका दायर की है। याचिका में ग्रंथ को भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने की राहत चाही गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए नियत था। लेकिन याचिकाकर्ता के वकील मौजूद न होने के चलते उनकी ओर से समय मांग लिया गया।

अब मामला दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा।समरीते ने याचिका में कहा है कि हिंदू धर्मग्रंथ मनुस्मृति भेदभाव व वैमनस्यता फैला रहा है। इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्यों को उच्च और शूद्रों को निम्न दर्जा दिया गया है। स्त्रियों के बारे में भी कई अनुचित व गलत बातें कही गई हैं। इस धर्मग्रंथ में बताया गया है कि शूद्रों के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य की सेवा उनका कर्तव्य है।

तर्क दिया गया कि यह धर्मग्रंथ जातिगत घृणा व वैमनस्यता फैला रहा है। इसकी विषयवस्तु संविधान के अनुच्छेद-15 का उल्लंघन है। इससे भेदभाव को बढ़ावा मिल रहा है। इसलिए इसे बैन किया जाए। जनहित याचिका में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग, प्रेस काउंसिल आफ इंडिया व मनुस्मृति के प्रकाशक विद्या विहार को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता शरद गुप्ता रखेंगे।

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