नयी दिल्ली, 01 मार्च (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा है कि जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 लागू होने के बाद से देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़े आवेदनों में तेजी आई है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में आईपीआर आवेदनों की संख्या बढ़कर 1,077 हो गई, जबकि 885 आवेदनों को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए। इससे 2024-25 में 857 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 792 को मंजूरी दी गई थी।
सरकार ने कहा है कि संशोधन के तहत अब हमारे जैविक संसाधनों पर आधारित किसी भी पेटेंट या अन्य आईपीआर के लिए आवेदन करने से पहले एनबीए से पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य हो गया है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है और जैविक संसाधनों के उपयोग को कानूनी दायरे में लाया गया है। बताया जा रहा है कि नये नियमों ने आवेदन प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट बना दिया है जिससे शोध संस्थानों और उद्योगों को ज्यादा सहूलियत मिली है। यही कारण है कि जैव प्रौद्योगिकी, फार्मा, कृषि रसायन और खाद्य विज्ञान जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवेदन आ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव न सिर्फ नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके निष्पक्ष उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा।
