
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि जब डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव है तो अपीलार्थी को दुष्कर्म का आरोपी कैसे बना दिया गया। जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस आरसीएस बिसेन की युगलपीठ ने अपीलार्थी को दी गई आजीवन कारावास की सजा निरस्त कर दी न्यायालय ने कहा है कि जुर्माने की वसूली गई राशि अपीलार्थी को वापस की जाए।
बालाघाट निवासी आशीष बिसेन की ओर से अधिवक्ता योगेन्द्र गोलंदाज ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बालाघाट की विशेष कोर्ट ने 13 सितंबर 2024 को अपीलार्थी को दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपीलार्थी पर आरोप था कि उसने 9 माह की बच्ची के साथ ज्यादती का प्रयास किया। उन्होंने दलील दी कि अपीलार्थी का पीडि़ता के परिवार से पुरानी दुष्मनी थी। डीएनए टेस्ट भी नकारात्मक आई, इसके बावजूद उसे दोषी करार दे दिया गया। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई के बाद कहा कि डीएनए रिपोर्ट नकारात्मक है, स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। पीडि़ता की मां ने अपीलकर्ता के साथ अपनी दुश्मनी स्वीकार की है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि यह झूठे केस में फंसाने का मामला है।
