
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्त तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से रिकवरी करना अवैधानिक है। उक्त मत के साथ जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ रिकवरी आदेश निरस्त कर दिया।
मंडला निवासी मान सिंह झारिया की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेन्द्र गर्ग ने बताया कि वार्ड बॉय के पद से 2022 को सेवानिवृत्त हुआ। विभाग ने 24 फरवरी 2025 को याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी के विरुद्ध 74 हजार रुपए की रिकवरी निकाल दी। विभाग ने यह दलील दी कि याचिकाकर्ता को जनवरी 1986 से 2003 तक अधिक भुगतान कर दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने रफीक मसीह प्रकरण में स्पष्ट दिशा निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व में किए गए अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी अवैधानिक है। इस संबंध में विभाग को अभ्यावेदन दिया गया। कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
