
छिंदवाड़ा। पिछले सप्ताह नगर पालिक निगम ने निरीक्षण के बाद भी अस्पताल के फायर सेफ्टी सिस्टम में कोई सुधार नहीं हुआ है। अभी भी अस्पताल का फायर सिस्टम कबाड़ की स्थिति में है। होज बाक्स और होजरी से पाइप और नोज गायद हो गए है। वही स्मोक डिटेक्टर भी खराब हो चुके है। ऐसे में यदि अस्पताल में आग लग जाए तो हजारों मरीज और उनके परिजनों की सुरक्षा कैसे होगी। अस्पताल प्रबंधन पर फायर सेफ्टी को लेकर संवालिया निषान लग रहे है। इस मामले में जानकारी बेहद ही चैकाने वाली सामने आई है। जिला अस्पताल का फायर प्लान निगम से स्वीकृत हो चुका है। उन्हें दुस्त करवाना है। इसके लिए एक साल का समय मिला है। तकरीबन तीन महीने का समय बीच चुका है। फायर सेफ्टी सिस्टम जब का तस पड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अस्पताल को एनओसी कैसे मिलेगी। हालांकि निगम ने ऐसी घटनाओं को बचने के लिए बार-बार नोटिस जारी कर रहा है। इसके बाद भी अस्पताल सिस्टम को दुरूस्त कराने कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है।
बाॅक्स में रखी पौंछा लगाने की बाल्टियां
जिला अस्पताल के जब फायर सिस्टम का जायजा लिया गया, तो सबसे नीचे के तल मे बाॅक्स में बाल्टियां रखी है। ग्राउंड फ्लोर के बाॅक्स में टेप चिपका दिया है। इस तरह अन्य मंजिल के फायर सिस्टम की हालात खस्ता है। वही ई-टाइप बिल्डिंग में इमरजेंसी सीढ़िया जंक से पूरी तरह गल चुकी है। जो मरीजों का सुरक्षित नीचे उतारने में कारगर नहीं है। इन सीढ़ियों से उतरते समय हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
निजी अस्पतालों में भी उड़ रही नियमों की धज्जियां
शासकीय अस्पतालों के साथ साथ निजी अस्पताल भी फायर सेफ्टी के नियमों की बुरी तरह धज्जियां उड़ा रहे है। जबकि अधिकांश अस्पताल तीन से चार मंजिल में संचालित हो रहे है। दो चार अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो फायर सेफ्टी महज दिखावे के लिए लगा हुआ है। अस्पताल में इमरजेंसी खिड़की, दरवाजा और सीढ़िया नहीं है। नीचे के मरीज तो जैसे निकल जाएंगे। वही ऊपरी मंजिल के मरीजों का आग में फंसना तय है।
