
जबलपुर। एनजीटी की क्षेत्रीय पीठ भोपाल ने नाले-नालियों से पीने के पाईपलाइन गुजरने के मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के न्यायिक सदस्य दिनेश कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की युगलपीठ ने एक संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह कमेटी स्थल निरीक्षण करेगी और इस बात की जांच करेगी कि कितनी पाइप लाइनें नाले-नालियों से गुजर रही हैं। इसके अलावा कमेटी सुधारात्मक सुझाव भी पेश करेगी। एनजीटी ने कमेटी को एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से एनजीटी में याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि जबलपुर में आपूर्ति हो रहा 47 प्रतिशत पेयजल पीने योग्य नहीं है। याचिका में कहा गया कि 80 प्रतिशत पीने के पानी की पाइप लाइनें नाले-नालियों से होकर गुजर रही हैं। दलील दी गई कि जल जीवन मिशन द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर में घरों में सप्लाय हो रहा 47 प्रतिशत पानी पीने लायक नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में पानी अत्यंत दूषित पाया गया है। ऐसी गंभीर स्थिति की जांच उच्च स्तरीय समिति गठित कर तत्काल कराई जाना चाहिए। जनहित याचिका में कहा गया है कि डिस्ट्रीब्यूशन लाईन की उम्र औसतन 20 वर्ष की होती है, लेकिन पिछले 40-50 वर्षों से यह पाईप लाईनें बदली नहीं गई हैं। जबकि इन्हीं पुरानी पाईप लाइनों में बार.बार लीकेज होने से पेयजल दूषित हो रहा है। एनजीटी ने संयुक्त समिति का गठन करने कहा है। इसमें सदस्य सचिव राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला कलेक्टर जबलपुर, आयुक्त नगर निगम जबलपुर को शामिल किया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। समिति को कहा गया है कि स्थल निरीक्षण करें, आरोपों की जांच करें और सुधारात्मक उपाय सुझाएं।
