कानून के किस प्रावधान के तहत बिना एफआईआर दर्ज किये की गयी जांच

जबलपुर। संज्ञेय अपराध की शिकायत पर पुलिस के द्वारा बिना एफआईआर दर्ज किये विवेचना किये जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस विभाग कानून में दिये गये प्रावधान तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर ध्यान नही दे रहा है। युगलपीठ ने नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि इस संबंध में वह व्यक्तिगत रूप से हलफनामा पेश करें। याचिका पर अगली सुनवाई 31 मार्च को निर्धारित की गयी है।

जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि नरसिंहपुर जिले के ग्राम बोरीपार निवासी उसका भाई गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 एक हादसे का शिकार हो गया था। जिसे उपचार के लिए जबलपुर स्थित एक अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसके अगले दिन 27 मार्च को उसे उपचार के लिए नागपुर ले जाया गया था। नागपुर में उसकी उपचार के दौरान मौत हो गयी थी। अपील में कहा गया था कि जबलपुर स्थित अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में उसके भाई के सीने में चोट के निशान बताये गये थे। मेडिकल रिपोर्ट में चोट की पुष्टि होने के कारण मौत के कारण को सामान्य नहीं माना जा सकता है।

भाई के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराये जाने की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक के समक्ष आवेदन किया था। आवेदन पर कार्यवाही नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण ली गयी थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा था कि मृतक को 27 मार्च 2025 को दफनाया गया था। रिकॉर्ड में कोई सबूत नहीं है कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम में कानूनी नियमों का उल्लंघन किया गया था। सिर्फ आशंका के आधार पर पुनः पोस्टमार्टम करने के आदेश जारी नहीं किये जा सकते है।

अपील की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ बताया गया कि नरसिंहपुर जिले के स्टेशन गंज थाना के एसएचओ ने जांच करते हुए संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। जांच में पाया गया कि मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य नहीं है। युगलपीठ ने हैरानी जताते हुए पूछा कि संज्ञेय अपराध में बिना एफआईआर दर्ज किये कानून के किन नियमों के तहत जांच कार्यवाही की गयी। सरकारी अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा पारित आदेश तथा नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक के द्वारा 11 नवंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार जांच की गयी थी। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस अधीक्षक व न्यायालय बिना एफआईआर दर्ज किये बिना कैसे जांच के आदेश जारी कर सकते है। युगलपीठ ने इस संबंध में नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा पेश करने के आदेश जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक तिवारी ने पैरवी की।

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