इंदौर:देश में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा लिए हुए इंदौर के कई क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या काफी जटिल हो चुकी है.इससे होने वाली समस्याओं से लोगों को जूझना पड़ रहा है. वार्ड पार्षद से लेकर अधिकारियों तक शिकायतें करने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. इससे नगर निगम अधिकारियों की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है. दरअसल यह संकट पुरानी पाइपलाइनों में सीवेज मिलने के कारण पैदा हुआ है. जनता की शिकायतों के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे सबसे स्वच्छ शहर के खिताब पर भी सवाल उठ रहे हैं.
तीन इमली (पालदा) क्षेत्र में आने वाले वार्ड 64 में भी ऐसी ही समस्या सामने आई है. खासकर इस वार्ड अंतर्गत आने वाली पवनपुरी कॉलोनी की गली नंबर 2 के रहवासी बेहद परेशान हैं. रहवासियों ने बताया कि क्षेत्र में पानी का प्रेशर बहुत ही कम आता है, जिससे पानी की किल्लत हमेशा बनी रहती है. पानी की पूर्ति नहीं हो पाती. जितने समय नल चलते हैं, उसमें आधा समय तो दूषित पानी ही आता है, जो इस्तेमाल करने योग्य नहीं होता.
दूषित पानी के कारण भागीरथपुरा में हुई मौतों के कारण दहशतजदा लोग दूषित पानी के भ्रम में साफ पानी भी डर-डरकर इस्तेमाल करते हैं. क्षेत्र में कई जगह तो ऐसी है, जहां पानी की सप्लाई के पूरे समय दूषित पानी ही आता रहता है. पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए क्षेत्रवासियों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर निजी बोरिंग से पानी की व्यवस्था करना पड़ती है. इस समस्या के निराकरण के लिए क्षेत्र के कुछ जिम्मेदार नागरिकों द्वारा नगर निगम झोन पर जाकर दूषित पानी और किल्लत को लेकर कई बार शिकायतें भी दर्ज कराईं, लेकिन अब तक निराकरण नहीं हो पाया.
यह बोले रहवासी
पानी तो अपने समय पर एक दिन छोडक¸र मिल रहा है, लेकिन नल आते ही शुरुआत और आखिर में गंदा पानी आता है, जो इस्तेमाल करने योग्य नहीं होता.
-ममता यादव
नलों से गंदा पानी तो कई सालों से आ रहा है. इसके लिए क्षेत्र के पार्षद मनीष मामा से भी हमने शिकायत की, लेकिन अभी तक इस समस्या से निजात नहीं मिली.
– माया केशवाल
गंदे और कम पानी की किल्लत के कारण पूर्ति नहीं हो पाती, फिर सरकारी बोरिंग से लाते हैं, अगर वह भी खराब हो जाए तो पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है.
– उमा मीणा
