भुवनेश्वर, (वार्ता) उड़ीसा उच्च न्यायालय ने ओडिशा के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग के एक अधिकारी को न्यायालय के आदेश का पालन करने में अत्यधिक देरी के लिए याचिकाकर्ता को जुर्माने के तौर पर एक लाख रुपये देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति कृष्ण श्रीपाद दीक्षित और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “यह अवमानना करने वाले (मनोज कुमार पटनायक, सरकार के अवर सचिव-सह-उप सचिव (प्रभारी), खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग) की ओर से जानबूझकर की गई देरी का मामला है।”
न्यायालय की एक अन्य पीठ ने इससे पहले 18 दिसंबर-2024 को ओडिशा सरकार के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग के उप सचिव से कहा था कि वे फैसला लेने के दो हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता देबाशीष नायक को इसकी जानकारी दें। उप सचिव ने हालांकि फैसला बहुत देरी से 19 फरवरी 2026 को लिया और उसकी एक कॉपी शिकायतकर्ता को 23 फरवरी 2026 को दी गयी।
पीठ ने कहा, “अवमानना करने वाले का रवैया कम से कम अवमाननापूर्ण तो है ही। यह संवैधानिक न्यायालय के आदेशों के प्रति बहुत कम सम्मान दिखाता है, या शायद बिल्कुल भी सम्मान नहीं। इसे हमारी तरफ से बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता। ऐसे रवैये को सख्ती से कुचला जाना चाहिए, और अवमानना करने वाले को अपनी जेब से भारी कीमत चुकानी होगी।”
न्यायालय ने कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों में, हालांकि अवमानना की कार्यवाही खत्म कर दी गयी है, फिर भी अवमानना करने वाले को इस मामले में जानबूझकर की गई देरी के लिए अपनी जेब से शिकायतकर्ता को चार सप्ताह के भीतर एक लाख रुपये देने होंगे। ऐसा न करने पर पहले महीने के लिए हर दिन की देरी पर 500 रुपये और उसके बाद के दिनों के लिए 1,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
