सीहोर। 20 दिन से ग्रामीण किसान जिले के अलग-अलग गांव में नदी, पेड़ों और रोड पर तो कहीं पानी की टंकी पर प्रदर्शन कर रहे थे. इसके अलावा कलेक्टर को भी दर्जनों गांव के किसानों द्वारा ज्ञापन भी दिया जा चुका है.
जब प्रशासन-शासन ने किसानों की सुनवाई नहीं की कोई भी अधिकारी बीमा कंपनी के किसानों के बीच में नहीं पहुंचा. अब मैदान में महिलाएं खराब फसल के खेतों में उतर आई हैं. हाथों में खराब फसल लिए हुए नारे लगा रही हैं. इनमें से एक महिला शिप्रा बाई तो इतनी दुखी हुई है. शिप्रा का कहना है कि मेरी 5 साल से बीमा नहीं मिला हर साल सोयाबीन की फसल बर्बाद हो जाती है. 2 दिन से मेरे बच्चों ने खराब सोयाबीन को देखकर खाना तक नहीं खाया. वहीं गोरा बाई, उर्मिला परमार, अयोध्या बाई, अवंती बाई ने अपना दुखड़ा बताया कि हम किस तरह परेशान हैं. हम महिलाएं दिन रात खेतों में काम करते हैं. छोटे-छोटे बच्चे लेकर खेतों में लेकर दिनभर काम करते रहते हैं. सरकार महिलाओं के लिए क्या कर रही है किस महिलाओं के क्या लाभ दे रही है. हमें तो कभी छुट्टी मिलती नहीं है और विभाग में सरकारी काम में महिलाओं को तो छुट्टी मिल जाती है. हम तो डिलीवरी होने के 15 दिन बाद से खेतों में काम करने लग जाती हैं. न तो हमें बीमा राशि मिलती न किसानों को फसल का सही भाव मिलता है.
