
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संविदा कर्मचारियों की स्थिति और युवाओं से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रबंधन को लेकर आरोप लगाया कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता के कारण लाखों कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि युवाओं का भविष्य भी अनिश्चितता में है।
पटवारी ने कहा कि संविदा नीति 2023 के पालन को लेकर विभागों, निगमों और मंडलों से रिपोर्ट तलब करना इस बात का संकेत है कि अब तक कर्मचारियों को उनके अधिकार नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1.5 से 2 लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। नीति लागू होने के बावजूद ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ पूरी तरह नहीं दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल बार-बार रिपोर्ट मंगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, इसके लिए ठोस निर्णय जरूरी हैं।
एक अन्य मुद्दे पर पटवारी ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा और पुलिस विभाग की उप निरीक्षक भर्ती की मुख्य परीक्षा को 26 अप्रैल को एक ही दिन आयोजित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हजारों अभ्यर्थी, जिन्होंने दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन किया है, अब दुविधा में हैं।
उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों को तुरंत लाभ दिए जाएं, स्पष्ट नीति बनाई जाए और परीक्षाओं में से किसी एक की तिथि बदली जाए। साथ ही चेतावनी दी कि जल्द निर्णय नहीं होने पर प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।
