आष्टा। कोठरी स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) द्वारा संचालित विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है. वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी नाम से प्रचार-प्रसार करने को लेकर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज कर लिया है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय अपने नाम में भोपाल का उपयोग कर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है, जबकि इसका वास्तविक परिसर भोपाल शहर में नहीं, बल्कि सीहोर जिले की आष्टा तहसील के ग्राम कोठरी में स्थित है. जानकारी के अनुसार, यह कैंपस भोपाल से लगभग 70-75 किलोमीटर दूर है. बावजूद इसके, ‘भोपालÓ नाम के उपयोग से अन्य राज्यों के छात्र ऑनलाइन एडमिशन के दौरान भ्रमित हो जाते हैं और यह मान लेते हैं कि विश्वविद्यालय राजधानी में ही स्थित है.बाद में वास्तविक स्थिति सामने आने पर उन्हें असुविधा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है.
इधर, विश्वविद्यालय पहले से ही छात्रों के आक्रोश का सामना कर चुका है। कुछ समय पूर्व मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया था। आरोप है कि कैंपस में पानी, स्वच्छता और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव है, जिससे छात्र लंबे समय से परेशान हैं। गुस्साए छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान तोडफ़ोड़ और आगजनी तक की थी, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी.
इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रशासन पर अव्यवस्था और लापरवाही के आरोप भी लगातार सामने आते रहे हैं। कैंपस में अवैध क्लीनिक संचालन की शिकायतें भी चर्चा में रही हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता और शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं होती. पूर्व में रैगिंग के मामलों को लेकर भी छात्र थाने तक पहुंचे थे. हालांकि, आरोप है कि उस दौरान भी संस्थान ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया. अब मानवाधिकार आयोग की एंट्री के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है. आने वाले समय में जांच के आधार पर संस्थान पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.
छात्रों के अधिकारों का कर रही वीआईटी उल्लंघन
इस मामले को लेकर एनएसयूआई ने मध्य प्रदेश शासन, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. संगठन का कहना है कि संस्थान द्वारा इस तरह का नाम उपयोग करना पारदर्शिता के खिलाफ है और छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन करता है. शिकायत के आधार पर आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब करना शुरू कर दिया है. मामले में छात्र संगठन नेताओं का कहना है कि वीआइटी प्रबंधन द्वारा छात्रहित के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जिसे सहन नहीं किया जाएगा.
